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Lucknow News: भारतीय गुप्त लिपि से हुआ था तिब्बती लिपि का विकास

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वॉरियर्स डिफेंस एकेडमी में सेना के भावी अधिकारियों को संबाेधित  करते राष्ट्रपति पेम्पा त्सेरिंग
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लखनऊ। निर्वासित तिब्बती सरकार (केंद्रीय तिब्बती प्रशासन-सीटीए) के राष्ट्रपति पेम्पा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लिपि का विकास भारतीय गुप्त लिपि से हुआ था। उन्होंने भारत की प्राचीन नालंदा परंपरा की बौद्ध शिक्षाओं को संरक्षित करने में तिब्बत की दीर्घकालिक भूमिका को अहम बताया। वे रविवार को वॉरियर्स डिफेंस एकेडमी में सेना के भावी अधिकारियों को संबाेधित कर रहे थे।
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उन्होंने तिब्बत में बड़े पैमाने पर बांध निर्माण परियोजनाओं के बारे में चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि इन विकास कार्यों का डाउनस्ट्रीम देशों पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। उन्होंने तिब्बतियों द्वारा किए गए आत्मदाह को भी तिब्बती धर्म, संस्कृति और पहचान को प्रभावित करने वाली चीन सरकार की नीतियों के विरोध के रूप में देखा। तिब्बत के अंदर मौजूदा स्थितियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तिब्बती बच्चों को तेजी से सरकार द्वारा संचालित बोर्डिंग स्कूलों में रखा जा रहा है, जहां शिक्षा की प्राथमिक भाषा चीनी है। उन्होंने कहा, इससे तिब्बती भाषा और संस्कृति के संरक्षण को खतरा है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अखिल विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, भारतीय सेना के खुफिया विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर राकेश भाटिया, पूर्व सैनिक सेवा परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मेजर आनंद टंडन मौजूद रहे।

वॉरियर्स डिफेंस एकेडमी में सेना के भावी अधिकारियों को संबाेधित  करते राष्ट्रपति पेम्पा त्सेरिंग

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