लखनऊ। म्यांमार के म्यावाड्डी शहर के केके पार्क में बंधक बनाए गए भारतीयों से जालसाज गैंग के गुर्गे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारतीय नागरिकों को टारगेट करने का टास्क देते थे। यह बात पूछताछ में आलमबाग के रहने वाले युवक ने पुलिस से बताई है। ऐसे लोग जिनकी उम्र 40 पार और तलाकशुदा हो, वे लोग सॉफ्ट टारगेट होते थे।
मंगलवार रात साइबर क्राइम व एलआईयू की टीम ने लौट युवकों से बात की तो पता चला कि जिस कंपनी में वे लोग काम करते थे, उसके मालिक का नाम फायरमैन है। युवकों को इंस्टाग्राम व फेसबुक पर लड़की की फोटो लगाकर फर्जी आईडी बनाने और फिर उसकी मदद से अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारतीय नागरिकों को जाल में फंसाने का टास्क दिया जाता था।
पहले उन्हें एक स्क्रिप्ट भी दी जाती थी। 40 की उम्र पार कर चुके और खासकर तलाकशुदा लोगों को जाल में फंसाया जाता था। जाल में फंसे व्यक्ति का व्हाट्सएप नंबर हासिल किया जाता था और नंबर मिलते ही उसे गैंग से दूसरे लोगों को देते थे।
गैंग के अन्य लोग निवेश के नाम पर जाल में फंसे लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। पहले जाल में फंसे हुए लोगों को निवेश के नाम पर कुछ रुपये बतौर मुनाफा भी दिया जाता था, ताकि वह लोग उनपर विश्वास कर सके और मोटी रकम निवेश कर सकें।
पासपोर्ट व दस्तावेज मांगने पर 5000 डालर मांगे जाते थे
अप्रैल 2024 में म्यांमार गए आलमबाग के रहने वाले युवक ने बताया कि वहां पहुंचने पर उन्हें बंधक बना लिया गया था। 11 माह का समय एक बिल्डिंग में गुजर गया। बाहर क्या हो रहा था, कुछ भी नहीं पता चल पाता था। इमारत में कैमरे की निगरानी में सभी लोग रहते थे। म्यांमार पहुंचते ही गिरोह से जुड़े लोग सबसे पहले शैक्षिक दस्तावेज और पासपोर्ट गिरोह से जुड़े लोगों ने ले लिया था। अगर वह लौटने के लिए दस्तावेज मांगते तो उनसे गिरोह के लोग 5000 यूएस डॉलर की रंगदारी मांगते थे।
सेना के कैंप में रखा गया था दो दिन
स्वदेश लौट युवकों के मुताबिक, पिछले हफ्ते म्यांमार सेना की छापेमारी इमारत में हुई। इससे भगदड़ मच गई। कई लोगों को पकड़ा भी गया था। वहां काम करने वाले करीब तीन से 400 लोगों को सेना ने रेस्क्यू कर निकाला। सेना ने सभी को पासपोर्ट और दस्तावेज दिलाए। सभी को म्यांमार सेना के कैंप में रखा गया। यहां भारतीय दूतावास से लोग पहुंचे। सभी को स्वदेश वापस लाया गया।
अच्छी अंग्रेजी और कंप्यूटर के जानकार युवकों को वीजा देकर बुलाते थे
पूछताछ में इस बात का पता चला है की नौकरी की चाह रखने वाले युवकों को फेसबुक के माध्यम से जालसाज संपर्क करते थे। पहले युवकों को बायोडाटा लिया जाता था। जालसाज उनका साक्षात्कार लेते थे। साक्षात्कार अंग्रेजी में होता था। कंप्यूटर की जानकारी के बारे में सवाल-जवाब होते थे। साक्षात्कार पास करने के बाद युवकों को नौकरी का वीजा और एयर टिकट भेजा जाता था। बैंकॉक पहुंचने के बाद टैक्सी के जरिये उन्हें म्यांमार पहुंचाया जाता था। एक नदी को नाव या स्टीमर की मदद से पार कर युवकों को जालसाजों के ठिकाने पर पहुंचाया जाता था। वेतन के रूप में 30 हजार थाई बाथ देने की बात तय होती थी, पर 24 से 25 हजार थाई बाथ हाथ में आता था। थोड़ी सी गलती पर जालसाज रुपये कटा लेते थे।
चीन के अभिनेता की तलाश के दौरान फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले चीन के अभिनेता वांग जिंग म्यांमार से लापता हो गए थे। उनकी तलाश में चीन, म्यांमार और थाईलैंड की सेना ने मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इसी सर्च ऑपरेशन के दौरान केके पार्क की बिल्डिंग में चल रहे कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ और बंधक बनाए गए 540 भारतीय को मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए लोगों ने 21 पूर्वी यूपी के थे और सभी को मंगलवार रात लखनऊ भेजा गया।