लखनऊ। प्रदेश के एकमात्र जिला अस्पताल जहां न्यूरो का इलाज उपलब्ध है, अब डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। बलरामपुर अस्पताल में तैनात न्यूरो सर्जन डॉ. विनोद तिवारी का संविदा कार्यकाल जनवरी में समाप्त होने के बाद अब विभाग का पूरा भार अकेले डॉ. रघुवीर श्रीवास्तव पर आ गया है।
डॉक्टर की कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन को कार्ययोजना में बदलाव करना पड़ा है। अब हफ्ते में केवल तीन दिन ओपीडी संचालित हो रही है, जबकि शेष तीन दिन ऑपरेशन के लिए निर्धारित है। इससे यहां रोजाना आने वाले 70 से 100 न्यूरो मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को बिना परामर्श के ही लौटना पड़ रहा है।
केजीएमयू और लोहिया संस्थान पर बढ़ा बोझ
सर्जरी प्रभावित होने और ओपीडी सीमित होने के कारण गंभीर मरीजों को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर किया जा रहा है। इन संस्थानों में पहले से ही मरीजों का अत्यधिक दबाव है, जिससे मरीजों के इलाज में देरी हो रही है।
Iएनएचएम के माध्यम से अस्पताल में नए न्यूरो सर्जन की तैनाती की मांग की गई है। डॉ. विनोद तिवारी का कार्यकाल पूरा होने से पद रिक्त हुआ है। हमें उम्मीद है कि एनएचएम की ओर से जल्द ही नई नियुक्ति की जाएगी।I
I
- डॉ. कविता आर्या, निदेशक, बलरामपुर अस्पतालI