समंदर ऐसी जगह है। जो रोमांच से भरी है लेकिन खतरों से खाली भी नहीं है। जहां नाव का पीछा करती डॉल्फिनें मन गदगद कर देती थीं। सूर्योदय व सूर्यास्त खुशियों से मन को भर देता था। वहीं रात में उठने वाले तूफान व कड़कड़ाती बिजली रोंगटे भी खड़े कर देती थी। ऊंची-ऊंची तूफानी लहरें नाव को उछाल देती थीं। ऐसा खराब मौसम, जो हिम्मत तक तोड़ देता था। पर, जब इससे जूझकर बाहर निकले तो हौसले बुलंद थे। एक अलग किस्म की खुशी चेहरे पर थी। रोमांच से भरा यह दिलचस्प किस्सा सुनाया लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाति पी. व लेफ्टिनेंट कमांडर ऐश्वर्या बोडापति ने। वे आईएनएसवी तारिणी की नाविक समूह में शामिल थीं। बृहस्पतिवार को फिक्की महिला संगठन की ओर से सीएमएस गोमतीनगर विस्तार में आयोजित कार्यक्रम में वे पहुंची थी, जहां उन्होंने आईएनएसवी तारिणी द्वारा किए गए विश्व भ्रमण के किस्से बच्चों को सुनाए। स्वाति वर्मा ने उनसे भ्रमण से जुड़े किस्सों के बारे में सवाल किए, जिसके उन्होंने बेबाकी से जवाब दिए। महिला सशक्तीकरण से लेकर एडवेंचर के तमाम किस्से उन्होंने साझा किए। चेयरपर्सन माधुरी हलवासिया ने बताया कि इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं को सैन्य सेवाओं के प्रति आकर्षित करना रहा।
इमरजेंसी में तट तक पहुंचने में लग जाते हैं 10 दिन
लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाति पी. ने बताया कि बीच समंदर हमेशा एक खतरा था कि मेडिकल इमरजेंसी हुई तो भी तट तक पहुंचने में कम से कम दस दिन लगते हैं। उन्होंने तैयारियों के बारे में बताया कि 15 महीने लगे। नेवी ने हमें सालभर का समय दिया था। कैप्सूल कोर्स कराया गया। वहीं लेफ्टिनेंट कमांडर ऐश्वर्या बोडापति ने कहा कि समंदर में सफर के दौरान त्वचा रोगों से बचना एक प्रमुख चुनौती होती है।
पिता को चाहिए थे बेटे, हुईं बेटियां...
नेवी क्यों जॉइन की? इस सवाल के जवाब में स्वाति पी. ने कहा कि मेरे पिता को बेटों की ख्वाहिश थी और इस उम्मीद में एक के बाद एक तीन बेटियां हो गईं। हालांकि, पिता ने हमारी परवरिश में कहीं कोई कमी नहीं छोड़ी। ऐसे में मैंने अपनी पहचान बनाने के लिए नौसेना को चुना। जबकि ऐश्वर्या बोडापति ने कहा कि समंदर बहुत आकर्षित करता है। मुस्कुराते हुए यूनीफॉर्म का चार्म अलग ही होता है।
जब परिजनों को कराई सेलिंग, तब हुआ विश्वास
भ्रमण पर जाने को लेकर परिवार के रिएक्शन के सवाल पर ऐश्वर्या ने कहा कि पता नहीं था, वापस लौटेंगे या नहीं। परिवार नाराज था। उनकी नाराजगी व डर लाजिमी भी था। इसलिए उन्हें सेलिंग पर ले जाती थी, तब जाकर उन्हें विश्वास हुआ। वहीं स्वाति पी. ने बताया कि मां तो बहुत सपोर्टिव थी, पर पिता आशंकित थे। ऑस्ट्रेलिया का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि नाव की मरम्मत कर रही थी कि एक महिला आई और पूछा की नेविगेटर कौन है तो बताया गया कि फला महिला तो उन्होंने कहा कि महिला नेविगेटर नहीं हो सकती। यह नारी की नारी के प्रति सोच है, जिसे बदलना था।
आसमानी शॉवर में नहाना था बेहद दिलचस्प
...रोमांच व खुशगवारी से भरपूर लम्हों के बारे में ऐश्वर्या ने बताया कि समंदर के बीच जब बारिश होती थी तो हम शैम्पू वगैरह लेकर नाव पर नहाने को आ जाते थे। यह बेहद सुखद अनुभव था। आसमानी शॉवर का मजा अलग था। वहीं स्वाति ने कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया की ओर बढ़ते थे और बारिश के बादल हिंदुस्तान की तरफ तो हम नाव का रुख बादलों के पीछे कर देते थे। ऐसे ही जब डॉल्फिन हमारा पीछा करती थीं तो उन्हें देखकर मन गदगद हो जाता था।
45 डिग्री में झुलसे, -5 में कांपे
लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाति ने बताया,समंदर में मौसम एक बड़ी चुनौती होती है। नमकभरी हवाएं। चिपचिपापन, बीमारियों का खतरा और डिहाइड्रेशन वगैरह। ऐसे मौसम भी हमने झेले, जब दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस होता था और बदन झुलस जाता था। जबकि दक्षिण ध्रुव के पास तापमान मानइस फाइव डिग्री तक हुआ, जहां हांड कांप जाते थे। रात में समुद्री तूफान, बिजलियां तो दिन में शुष्कता भरा मौसम भी झेला।
जेंडर की सोच से निकलो बाहर, हार मत मानो
बच्चों के सवाल पर स्वाति व ऐश्वर्या ने कहा कि सबसे पहले जेंडर की सोच से बाहर निकलिए। यह मत सोचिए कि लड़की हैं, महिला हैं तो कैसे करेंगे। खुद पर भरोसा करिए और हार कभी भी मत मानिए। चुनौतियों का डटकर सामना करिए। घर-परिवार, समाज, जॉब हर जगह जूझना होगा, इसलिए हिम्मत हमेशा बुलंद होनी चाहिए।
254 दिन का रोमांच से भरा समुद्री सफर
आईएनएसवी तारिणी नाविका सागर परिक्रमा एक वॉलेंटरी प्रोजेक्ट था, जिसे गत वर्ष गोवा से रवाना किया गया। यह 254 दिनों का रोमांचकारी समुद्री सफर था। जिसमें नौसेना की छह महिलाएं, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, स्वाति पी., ऐश्वर्या बोडापति, एस. विजया देवी व पायल गुप्ता थीं, जिसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने किया। यात्रा छह चरण में पूरी की गई। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फॉकलैंड द्वीप, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस में पड़ाव डाला। 21,600 नॉटिकल माइल की दूरी तय कर क्रू ने दो बार भूमध्य रेखा, तीन महासागर, चार महाद्वीप व पांच देशों का सफर किया।