लखनऊ। रो के खेमे में जैनब पुकारी, आज मेहंदी है कासिम तुम्हारी....जाऊं सौ बार तुम पे वारी, आज मेहंदी है कासिम तुम्हारी....। दर्द भरे नौहों के बीच मुहर्रम के सातवें दिन बृहस्पतिवार को रवायती अंदाज में अकीदत के साथ शाही मेहंदी का जुलूस निकला तो स्याह लिबास में अजादार नंगे पांव ही जुलूस के साथ चल दिए। अजादारों ने मातम कर कर्बला के शहीदों को आंसुओं का पुरसा दिया।
हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से हजरत इमाम हुसैन के भतीजे और हजरत इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम की याद में मेहंदी का जुलूस नवाबी अंदाज में पूरी शानों शौकत के साथ आसिफी इमामबाड़े से निकला। इमामबाड़े से निकल कर जुलूस रूमी गेट, पावर हाउस, घंटाघर के सामने से होता हुआ देर रात छोटे इमामबाड़े पहुंचा। जुलूस में शामिल हजरत अब्बास की निशानी अलम, इमाम हुसैन के छह माह के बेटे जनाबे अली असगर का गहवारा (झूला) और इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह और ताबूत आदि तबर्रुकात की जियारत के लिए अकीदतमंद बेकरार हो रहे थे।
नज्र दिला हजरत कासिम को दिया पुरसा
मुहर्रम की सात तारीख को हजरत इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम की शहादत का गम मनाया गया। अकीदतमंदों ने घरों में नज्र का आयोजन कर उन्हें खिराजे अकीदत पेश की। शहर में कई जगहों पर हजरत कासिम की मेहंदी की जियारत कराई गई।