रायबरेली। विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कुसिहा में भवन की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। बारिश की वजह से एक कमरे की छत भरभराकर ढह गई। गनीमत रही कि घटना के समय स्कूल बंद था, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ। अगर यही घटना स्कूल संचालन के समय होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। सोमवार को स्कूल खुला तो ढही छत का मलबा देखकर बच्चे भी डरे-सहमे रहे। शिक्षकों ने सभी को समझा दिया कि कोई भी बच्चा जर्जर हिस्से की तरफ नहीं जाएगा।
प्राथमिक विद्यालय कुसिहा में पांच कमरे बने हैं, जिसमें से दो कमरों का ही उपयोग किया जाता है। इन्हीं दोनों कमरों में पांच कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं। बाकी तीन कमरे जर्जर हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इन्हीं में से एक कमरे की छत रविवार रात ढह गई।
प्रधानाध्यापक निरुपमा सोनकर ने बताया कि वह 2016 से इस विद्यालय में तैनात हैं। उसी समय से जर्जर कमरों में बच्चों को नहीं बैठाया जा रहा है और न ही किसी को उधर जाने दिया जाता है। कई बार जर्जर कमरों को तोड़वाने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। खंड शिक्षा अधिकारी रत्नामणि मिश्रा ने बताया कि जर्जर भवनों को जल्द ही नीलामी कराकर तोड़वाया जाएगा।
महराजगंज। परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू हो गया। कंपोजिट विद्यालय महराजगंज में जलभराव होने के कारण बच्चों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। इंचार्ज प्रधानाध्यापक रमेश बहादुर सिंह ने बताया कि 357 बच्चों में से 78 बच्चे आए। सभी स्टाफ भी उपस्थित रहा और बच्चों को पढ़ाया। समय पर मेन्यू के अनुरूप मध्याह्न भोजन खिलाया गया। अन्य स्कूलों में भी पढ़ाई शुरू हो गई है, लेकिन अव्यवस्थाएं नजर आईं।