लखनऊ। सीमा पर युद्ध के दौरान घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए ‘रक्षक’ नाम का रोबोट तैयार किया गया है। यह रोबोट न केवल घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करेगा, बल्कि उन्हें आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराएगा। साथ ही घटनास्थल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी कमांड सेंटर तक पहुंचाकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में भी सहायक होगा।
इस रोबोट मॉडल को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र अमन कुमार वर्मा ने विकसित किया है। यह एक मानव रहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है, जो सेना और सुरक्षा बलों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
लैंडमाइन पहचानने और बम निष्क्रिय करने में सक्षम
अमन कुमार वर्मा के अनुसार, ‘रक्षक’ रोबोट जमीन में दबे लैंडमाइन का पता लगाने, बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने और घायल सैनिकों को निकालने में सक्षम है। इसे दूर से संचालित किया जा सकता है। इसमें 360 डिग्री कैमरा, बम डिस्पोजल सिस्टम, लैंडमाइन डिटेक्शन तकनीक और भारी सामान उठाने की क्षमता जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसकी ध्वनि भी कम है, जिससे यह संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। भविष्य में इस रोबोट को ‘वैष्णवास्त्र’ नामक ड्रोन के साथ जोड़ने की योजना है, जिससे निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
एमएसएमई से 11 लाख रुपये का अनुदान
इस परियोजना को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 5.0 के तहत स्वीकृति मिली है। परियोजना के लिए 11 लाख रुपये का अनुदान भी मंजूर किया गया है। इससे अन्य विद्यार्थियों को भी इस प्रोजेक्ट पर काम करने और तकनीकी अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा।
आचार्य संजय सिंह के अनुसार रक्षक जैसे नवाचार देश की सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान हैं। विश्वविद्यालय ऐसे नवाचारी प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित करेगा।
रक्षक रोबोट की एआई तस्वीर।