मजलिस को खिताब करते मौलाना कल्बे अहमद नकवी।
लखनऊ। कुरआन महज तिलावत की किताब नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए हिदायत का दस्तूर है। अहलेबैत ने पूरी जिंदगी कुरआन की तालीम पर अमल करके दिखाया और उसी रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। यह बात मौलाना कल्बे अहमद नकवी ने हुसैनाबाद स्थित बड़ा इमामबाड़ा में आयोजित खम्सा-ए-मजालिस के तीसरे दिन ''कुरआन और अहलेबैत'' विषय पर कही।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज को कुरआन की शिक्षाओं, अच्छे अखलाक, इंसाफ और भाईचारे की सबसे ज्यादा जरूरत है। नौजवान अहलेबैत की सीरत को जीवन का हिस्सा बना लें तो समाज की अनेक बुराइयों से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों से कुरआन को समझकर उस पर अमल करने और अहलेबैत की शिक्षाओं को अपनाने की अपील की।
मजलिस की शुरुआत कारी मासूम मेहदी लाहयी ने तिलावत-ए-कुरआन से की। इसके बाद मौलाना सैय्यद कल्बे अहमद नकवी ने खिताब किया। हुसैनाबाद ट्रस्ट कर्मचारियों की ओर से आयोजित मजलिस में काफी संख्या में अकीदतमंद थे।
मजलिस को खिताब करते मौलाना कल्बे अहमद नकवी।
मजलिस को खिताब करते मौलाना कल्बे अहमद नकवी।
मजलिस को खिताब करते मौलाना कल्बे अहमद नकवी।