लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान और अनादि संस्था की ओर से गोमतीनगर के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में संस्कृत नाटक ‘अधुना अलम् अतिभाषणेन् भो’ का मंचन किया गया। इस नाट्य कृति ने शिक्षा विभाग में व्याप्त खामियों और व्यवस्थागत चुनौतियों को उजागर किया। मनोरमा श्रीवास्तव लिखित हिंदी नाटक ‘अब बस भी करो यार’ का संस्कृत में अनुवाद और निर्देशन मुन्नी देवी ने किया।
नाटक में दिखाया गया कि एक विद्यालय के प्रधानाचार्य ने शिक्षकों को सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन दो से तीन दिन में निपटाने का निर्देश दिया। इसके बाद शिक्षक स्टाफ रूम में बैठकर इन आयोजनों में होने वाले खर्चों में अपने कमीशन को लेकर चर्चा करते हैं। वे अपने परिचितों को काम देकर कमीशन तय करने का फैसला करते हैं। तभी एक चपरासी भी काम मांगता है ताकि वह भी कमीशन कमा सके, जिस पर सभी चौंक जाते हैं। नाटक का सूत्रधार अंत में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। वह कहता है कि मुफ्त का खाना, मुफ्त की पढ़ाई, मुफ्त की किताबें और मुफ्त की यूनिफॉर्म जैसी योजनाएं शिक्षा विभाग के लिए बड़ा सवाल हैं। वह पूछता है कि लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ाना चाहते, जबकि वहां अच्छे अध्यापक और सुविधाएं हैं। यह शिक्षा के प्रति खिलवाड़ है, जिस पर सभी कलाकार एक साथ अधुना अलम् अतिभाषणेन् भो... कहकर नाटक का समापन करते हैं। मंच पर अनुपम बिसरिया, भूपेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, अज़हर सिद्दीक़ी, अभय सिंह रावत, अभिषेक कुमार, लावण्या बाजपेई और अंजलि वर्मा ने अभिनय किया।
नाटक का मंचन करते कलाकार।
नाटक का मंचन करते कलाकार।
नाटक का मंचन करते कलाकार।