लखनऊ। बिम्ब सांस्कृतिक समिति की ओर से कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बृहस्पतिवार को निर्देशक महर्षि कपूर के नाटक ब्लैक होल का मंचन हुआ। संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली की रंगमंडल योजना और भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से पेश किए गए इस नाटक में पद, पैसा और प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ में डूबती मानवीय नैतिकता का सशक्त रूपक बनकर उभरा।
लेखक राम किशोर नाग के इस नाटक ने आधुनिक परिवार की टूटती संरचना को गहरे बिंबों में उकेरा। कथा एक उच्चपदस्थ अधिकारी कुरु और उसकी पत्नी आशी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी महत्वाकांक्षाएं उन्हें अपने बच्चों से भावनात्मक रूप से दूर कर देती हैं। परिणामस्वरूप संतानें भटकाव, अकेलेपन और मानसिक संघर्ष के अंधेरे में फंस जाती हैं।
नाटक का सबसे प्रभावशाली क्षण तब आता है, जब नौकर भोले काका का बेबाक संवाद जीवन मूल्यों की उपेक्षा पर करारा प्रश्न खड़ा करता है। यह संवाद दर्शकों को सोचने पर विवश कर देता है कि सफलता की दौड़ में हम किस हद तक अपने ही अस्तित्व से दूर चले गए हैं।
मंच पर गुरुदत्त पांडेय, रितु श्रीवास्तव, मुस्कान सोनी, आकाश सैनी, महर्षि कपूर और विवेक रंजन सिंह के सशक्त अभिनय ने कथा को जीवंत बना दिया। ब्लैक होल एक चेतावनी है कि यदि समय रहते रिश्तों और मूल्यों को नहीं संभाला गया, तो चमक के पीछे केवल शून्य शेष रह जाएगा।
समय रहते रिश्तों को संभाल लेने की सीख दे गया नाटक ब्लैक होल
समय रहते रिश्तों को संभाल लेने की सीख दे गया नाटक ब्लैक होल
समय रहते रिश्तों को संभाल लेने की सीख दे गया नाटक ब्लैक होल
समय रहते रिश्तों को संभाल लेने की सीख दे गया नाटक ब्लैक होल