फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: कुमार विश्वास की पंक्तियों पर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा पंडाल

विज्ञापन
श्रवण धाम महोत्सव में कवि डॉ. कुमार विश्वास का स्वागत करते एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय, एसपी अ​भिजी
विज्ञापन
श्रवण क्षेत्र (अंबेडकरनगर)। मातृ-पितृ भक्ति के प्रतीक के रूप में विख्यात श्रवण धाम में चल रहे श्रवण महोत्सव के दूसरे दिन साहित्य और काव्य प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय बन गया। देश के सुप्रसिद्ध और विख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी ओजपूर्ण और भावपूर्ण कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विज्ञापन


डॉ. कुमार विश्वास ने श्रवण धाम के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि विश्व की पहली कविता इसी भूमि पर लिखी गई। इसका उन्होंने व्याख्यान प्रस्तुत किया। कहा कि इस तपोभूमि पर श्रवण कुमार के माता-पिता ने दशरथ को श्राप न दिया होता, तो शायद राम का अवतरण न होता। इसके बाद उन्होंने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से लोगों को खूब आनंदित किया। कुमार विश्वास ने मैं अपने गीत-गजलों से उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूं से शुरुआत की। निहा खुद में भी थोड़ा सा हूं, थोड़ा सा हूं जाहिर भी, मैं दस्तूरे जहां में कुछ अनाड़ी भी हूं, माहिर भी। मेरे अंदर न जाने कितने मैंं मिल जुलकर रहते हैं, मैं दीवाना भी, पागल भी आशिक भी हूं, शायर भी। मुझे दिल में बसाकर अपने घर जाओ तो अच्छा हो, मेरे लब्जों की बगिया से गुजर जाओ तो अच्छा हो, ये सारी शाम जब नजरों ही नजरों में बितमा ली है तो कुछ पल और आंखों में ठहर जाओ तो अच्छा हो। कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है जैसी लोकप्रिय कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बॉक्स
अन्य कवियों ने भी मोहा मन
वीर रस के कवि अभय सिंह निर्भीक ने बहादुर सैनिकों के शौर्य के किस्से सुनाउऊंगा, किसी की चेतना सोई तो मैं उसको जगाऊंगा, मेरी कविता सदा देश का गुणगान करती है, मां भारती के अर्चना के गीत गाऊंगा प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को ठहाकों से लोटपोट कर दिया। प्रेम रस की कवयित्री साक्षी तिवारी ने पढ़ा कि भले मेरे पीछे जमाना पड़ेगा, मगर तुम बुलाओ तो आना पड़ेगा। कभी थम रही है, कभी चल रही है, उम्मीदें खत्म, जिंदगी चल रही है, जमाना मेरे संग-संग चल रहा है, बराबर में तेरी कमी चल रही है से खूब वाहवाही लूटी। सुदीप भोला ने आनंद रस की कविताएं पढ़कर लोगों को आनंदित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें