लखनऊ। प्रबंध नगर आवास योजना-1 के लिए घैला गांव में अधिगृहीत जमीन के मामले में रेरा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पीठासीन अधिकारी हरेंद्र बहादुर सिंह ने समय पर मुआवजा न देने पर एलडीए और राज्य सरकार को 1.5 करोड़ रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। पहले यह राशि मात्र 2.57 लाख रुपये थी। कोर्ट ने इस विलंब के लिए एडीएम (भूमि अध्याप्ति) कार्यालय की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व को भी आदेश की प्रति देने का निर्देश दिया है। पत्रावली के अनुसार अजमत अली ने रेरा में अर्जी देकर कहा था कि उनकी जमीन के अर्जन के लिए 23 अगस्त 2010 को मुआवजा निर्धारण हुआ था। मुआवजा निर्धारण के खिलाफ उन्होंने अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) नगर महापालिका प्रथम लखनऊ को चार अक्तूबर 2010 को अपनी संपत्ति दी थी। मगर, इस मामले को निस्तारण के लिए एलडीए को नहीं भेजा गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति नगर पालिका प्रथम के मुआवजा निर्धारण के खिलाफ मामले को प्राधिकरण के पास न भेजने में संबंधित एडीएम (एलए) के कार्यालय की लापरवाही पाई। इसलिए अब अतिरिक्त ब्याज की दर से मुआवजा देना होगा ।
यह है मामला
साल 2007 में योजना के लिए 1,777 बीघा जमीन अधिगृहीत हुई थी। 2010 में एडीएम भरत पांडे ने 2.57 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा तय किया था। इस पर अजमत अली समेत 857 किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि जमीन की कीमत कम लगाई गई है, लेकिन फाइल निस्तारण के लिए आगे नहीं भेजी गई। कोर्ट ने अब अतिरिक्त ब्याज के साथ नया मुआवजा देने का निर्देश दिया है।