लखनऊ। सौंदर्य के क्षेत्र में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महिलाएं अब त्वचा के रंग को बदलने के बजाय उसकी प्राकृतिक रंगत को निखारने पर ध्यान दे रही हैं। मेकअप का उद्देश्य भी बदल गया है, अब चेहरा गोरा दिखाना नहीं, बल्कि त्वचा को स्वस्थ और दमकता हुआ बनाना प्राथमिकता बन गया है।
इसी बदलाव के चलते बाजार में फेयरनेस क्रीम की जगह ग्लो सीरम और स्किन रिपेयर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। ब्यूटी एक्सपर्ट पिंकी के अनुसार, महिलाएं अब पार्लर में स्किन टोन बदलवाने के लिए नहीं, बल्कि त्वचा की गहराई से सफाई और हाइड्रेशन के लिए आती हैं। उनकी प्राथमिकता स्किन को ‘हाइड्रेटेड’ और ‘इवन-टोन’ बनाना होती है।
यह बदलाव केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि स्किन केयर को लेकर बढ़ती जागरूकता का संकेत है। अब महिलाएं अपनी प्राकृतिक सांवली रंगत को भी आत्मविश्वास के साथ अपना रही हैं। ‘नो-मेकअप’ लुक और ‘ड्यूई स्किन’ जैसे ट्रेंड्स इस नई सोच को मजबूत कर रहे हैं, जहां प्राकृतिक सुंदरता को प्राथमिकता दी जा रही है।
ब्यूटीशियन नेहा बताती हैं कि अब महिलाएं ब्लीच जैसे कठोर रसायनों से दूरी बना रही हैं। इसके स्थान पर विटामिन-सी, हयालूरोनिक एसिड और नियासिनमाइड जैसे पोषक तत्वों से युक्त उत्पादों को अधिक पसंद किया जा रहा है। बाजार में पिछले दो वर्षों में स्किन केयर और डर्मेटोलॉजिकल टेस्टेड उत्पादों की मांग में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके साथ ही, सांवली और विभिन्न त्वचा रंगों के लिए विशेष रूप से तैयार फाउंडेशन शेड्स की मांग भी तेजी से बढ़ी है, जो बदलते सौंदर्य मानकों को दर्शाती है।