कार्यक्रम के समापन के दौरान मौजूद विद्यार्थी।
लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विवि में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में रविवार को पद्म भूषण पंडित अजय चक्रवर्ती ने विद्यार्थियों को राग श्याम कल्याण, शुद्ध सारंग, मारवा, पूरिया, सोहिनी और बागेश्री जैसे रागों की बारीकियां बताईं। उन्होंने सम प्राकृतिक रागों से अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने मींड, खटका, आंदोलन जैसे अलंकारों पर उदाहरण समेत चर्चा की और पूर्व के दो दिनों में पढ़ाए गए विषयों की पुनरावृत्ति भी की। विद्यार्थियों के सवालों का उत्तर भी दिया। समापन के दौरान कुलपति ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे कार्यशाला में बताई बातों को गायन में उतारें। कार्यशाला का सफल संचालन प्रो. डॉ. सृष्टि माथुर ने किया।