शहर में कई जगह कूड़ा पड़ा हुआ है।
लखनऊ। घरों से कूड़ा कलेक्शन के लिए अनिवार्य रेडियो आवृत्ति पहचान (आरएफआईडी) प्लेट रामकी कंपनी ने दो साल बाद भी नहीं लगाई है। टेंडर की शर्तों के तहत इसे लगाना अनिवार्य था। अब ऑडिट टीम ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रामकी कंपनी शहर में करीब दो साल से काम कर रही है। अनुबंध के अनुसार कंपनी को घरों से कूड़ा इकट्ठा कर शिवरी प्लांट तक पहुंचाना है। रेडियो आवृत्ति पहचान प्लेट से कूड़ा कलेक्शन की निगरानी आसान होती। इससे पता चलता कि कंपनी कितने घरों से नियमित रूप से कूड़ा उठा रही है।
अक्सर घर-घर कूड़ा कलेक्शन वाली गाड़ियां समय पर नहीं आती हैं। इस कारण घरों में कई दिनों तक कूड़ा पड़ा रहता है। पिछले दिनों गोमतीनगर में महापौर और नगर आयुक्त के निरीक्षण में भी ऐसी शिकायतें मिली थीं। अब इसको लेकर नगर निगम की लेखा परीक्षा टीम ने भी सवाल उठाए हैं।
ऑडिट टीम ने पूछा है कि कितने घरों से उपयोगकर्ता शुल्क वसूला जा रहा है, जांच के लिए मिली जानकारी से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है। शर्तों के तहत कम से कम कितने घरों से कूड़ा कलेक्शन और कितना उपयोगकर्ता शुल्क वसूलना अनिवार्य है। टीम ने पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान से इस संबंध में जवाब मांगा है। प्रधान ने कहा कि पूरी रिपोर्ट भेज दी जाएगी।