लखनऊ। हजरत इमाम हुसैन के सफीर (दूत) हजरत मुस्लिम बिन अकील (अस) की शहादत की याद में बृहस्पतिवार को शहर में कई जगहों पर मजलिसों का आयोजन कर गम मनाया गया। अजादारों ने मजलिसों में शामिल होकर आंसुओ से पुरसा दिया।
रुस्तम नगर स्थित दरगाह हजरत अब्बास में सफीर-ए-हुसैन का मातम शीर्षक से आयोजित मजलिस को मौलाना कल्बे जव्वाद ने खिताब किया। मौलाना ने कहा कि हजरत मुस्लिम वह महान व्यक्ति थे उनके कई बेटे हजरत इमाम हुसैन (अ.स) पर कुर्बान हो गए। मजलिस के बाद शहर की अंजुमनें हजरत मुस्लिम के ताबूत को नौहाख्वानी करती हुई शबीह-ए-नजफ ले गई।
डालीगंज स्थित कर्बला शाह नसीरूद्दीन हैदर में मजलिस को मौलाना अनवर हुसैन ने खिताब किया। मजलिस के बाद ताबूत और जुलजनाह की जियारत कराई गई। इस दौरान अंजुमन शब्बीरया, मुहिब्बाने हुसैन आदि ने नौहाख्वानी की। हुसैनाबाद स्थित रौजा-ए-हजरत मुस्लिम रईस मंजिल में अंजुमन गुंचाए मेहंदिया की ओर से आयोजित मजलिस को मौलाना गुलाम मेहंदी ने खिताब किया। चौक स्थित जन्नत की खिड़की में आयोजित मजलिस को मौलाना सैयद मोहम्मद अस्करी ने खिताब किया।