वृद्धा आश्रम में शनिवार शाम हुए कवि सम्मेलन में काव्य पाठ सुनते बुजुर्ग। -संवाद
लखनऊ। यूं तो शहर में कवि सम्मेलन और मुशायरों का आयोजन होता ही रहता है लेकिन शनिवार को जब खास तौर पर अपनों के ठुकराए हुए वृद्धजनों के सामने रचनाकारों ने कविताएं सुनाईं तो उनकी आंखें सजल हो गईं। मौका था सरोजनीनगर स्थित सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान की ओर से संचालित वृद्धाश्रम में आयोजित कवि सम्मेलन का। राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान व विकास दृष्टि की ओर से यहां आयोजन किया गया।
''एक शाम बुजुर्गाें के नाम'' कार्यक्रम का शुभारंभ नेशनल कमिशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट के डायरेक्टर नित्यानंद ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। संचालन कर रहे आईएएस अधिकारी व कवि डॉ. अखिलेश मिश्रा ने जब अपनी पंक्तियां पढ़ीं तो सभी आंखें नम हो गईं। उन्होंने सुनाया- घर मकां बंट गए, रोटियां बंट गईं, बाप मां बंट गए, अर्थियां बंट गईं। कवयित्री डॉ. सरला शर्मा आसमा ने सुनाया- किसे है शौक भला इतने गम सजाने का, मगर ये वक्त है अब खुद को आजमाने का। उन्होंने पढ़ा- ये भी मां-बाप से सीखा है कि बच्चों के लिए अपनी हर एक ख्वाहिश से बगावत करना। डॉ. शोभा दीक्षित भावना ने पढ़ा- जमाने भर की रुसवाई मिली है, मोहब्बत में ये सच्चाई मिली है। शशि नारायण त्रिपाठी ने सुनाया- खुद भूखे रहकर भी जिसने हम बच्चों को पाला है, झुककर करो प्रणाम उन्हें नित जिसने दिया निवाला है।
इसके अलावा वर्षा श्रीवास्तव, आलोक रावत ने भी काव्यपाठ किया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष एवं सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान के संस्थापक अध्यक्षता डॉ. सुशील त्रिवेदी ने की। इस अवसर पर शैलेंद्र मिश्रा, कीर्ति वर्धन बाजपेई, कुलदीप त्रिवेदी, मानसी वर्मा, मानवी शर्मा सहित वृद्धा आश्रम के सभी सदस्य उपस्थित रहे। कविताओं का यह भावपूर्ण सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
वृद्धा आश्रम में शनिवार शाम हुए कवि सम्मेलन में काव्य पाठ सुनते बुजुर्ग। -संवाद
वृद्धा आश्रम में शनिवार शाम हुए कवि सम्मेलन में काव्य पाठ सुनते बुजुर्ग। -संवाद