लखनऊ। शहर की पांच सेक्सोलॉजिस्ट क्लीनिक की आयुर्वेद दवाओं में स्टेरॉयड मिलने की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। रिपोर्ट आने के तीन माह बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी है। संचालक आयुष विभाग से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में एफएसडीए बैकफुट पर आ गया है। एफएसडीए आला अफसरों को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश ले रहा है।
आईजीआरएस पोर्टल पर मिली शिकायत का गंभीरता से लेते हुए एफएसडीए ने 18 फरवरी को हजरतगंज स्थित एसके जैन, एपी सेन रोड स्थित डॉ. एके जैन, हुसैनगंज चौराहा बासमंडी स्थित डॉ. पीके जैन, हुसैनगंज स्थित राणा डिस्पेंसरी और चारबाग पानदरीबा स्थित डॉ. ताज की क्लीनिक में छापा मारकर दवाओं के 10 नमूने जांच के लिए मेरठ लैब भेजा था। 22 अप्रैल को इसकी रिपोर्ट आई थी, जिसमें आयुर्वेद की दवाओं में स्टेरॉयड मिलने की पुष्टि हुई है। यह स्टेरॉयड प्राकृतिक है या फिर शर्तिया इलाज के लिए मिलाया गया है, इसके लिए क्लीनिक संचालकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया था। संचालकों ने पत्र भेजकर आपत्ति जताई कि वह मरीजों को आयुर्वेद दवाएं देते हैं। लिहाजा जांच का अधिकार भी आयुष विभाग को है। इसे लेकर ड्रग इंस्पेक्टर ने अब सहायक मंडल आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर को पत्र भेजकर दिशा निर्देश मांगा है। ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या के मुताबिक, आयुर्वेदिक दवाओं की जांच के लिए आला अफसरों को पत्र भेजा गया है। वहां से नए दिशा निर्देश मिलने बाद आगे की कार्रवाई होगी।