गर्भाशय में गॉज पैड छूटने के मामले की जांच ठंडे बस्ते में
लखनऊ। गोसाईंगंज सीएचसी में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान गर्भाशय में गॉज पैड (हेमोस्टैटिक पैड) छूटने के मामले की जांच कमेटी ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। 15 दिन बाद भी कमेटी अभी तक संबंधित डॉक्टर व परिजनों के बयान दर्ज नहीं कर पाई है। ऐसे में परिजनों ने कमेटी की जांच पर सवाल उठाए हैं।
मालूम हो कि गोसाईंगंज के बेगरियामऊ गांव निवासी रत्नेश सिंह ने पत्नी सोनिया को प्रसव पीड़ा होने पर 22 सितंबर को सीएचसी में भर्ती कराया था। उसी दिन सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने पर प्रसूता को लोहिया संस्थान के मातृ एवं शिशु हॉस्पिटल रेफर में भर्ती कराया गया था। पांच दिन के बाद उसे छुट्टी दे दी गई थी। 8-10 दिन बाद महिला के टांके पकने लगे थे। आरोप है कि दोबारा सीएचसी ले जाने पर डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया था। परिजन महिला को घर ले आए थे। 14 नवंबर को महिला को फिर दर्द उठा। पेशाब के दौरान रुमाल के आकार का पट्टी जैसा कपड़ा निकला था।
पति ने ऑपरेशन के दौरान पेट में गॉज पैड छोड़ने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। सीएमओ ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अभी तक डॉक्टर व परिजनों के बयान दर्ज नहीं किए हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि डॉक्टर छुट्टी पर गई थीं। इस कारण उनके बयान दर्ज नहीं हुए हैं। दोनों पक्षों के बयान के बाद कमेटी रिपोर्ट देगी। इसके आधार पर कार्रवाई होगी।