हड़प्पा संस्कृति पर बोलते प्रो. अनिल कुमार
लखनऊ। राज्य संग्रहालय में वासुदेव शरण अग्रवाल स्मृति व्याख्यानमाला के तहत हड़प्पा सभ्यता की कला पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि करीब पांच हजार साल पहले भारत में कला और शिल्प की समृद्ध परंपरा थी। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभागाध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता की मृण्मूर्तियां, कांस्य प्रतिमाएं, पाषाण मूर्तियां, मुहरें, मनके, आभूषण और चित्रित मृद्भांड इस विकसित परंपरा के प्रमाण हैं। उन्होंने कांस्य ''नृत्यांगना'' प्रतिमा और दाढ़ीधारी पुरुष की प्रस्तर प्रतिमा का उल्लेख किया। राज्य संग्रहालय के निदेशक विनय कुमार सिंह ने भी अपनी बात रखी।