केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में लड़ाई होने पर जंग की जमीनी हकीकत बदली हुई दिखेगी। रक्षा उत्पादों में नवाचार और आधुनिक तकनीक के प्रयोग में भारत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है।
हालांकि, भारत के लिए शांति भावना सर्वोच्च है। भारत को रक्षा क्षेत्र का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए पीपीपी रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह रणनीति है-पॉलिसी (नीति), प्रोडक्शन (उत्पादन) और पार्टनरशिप (साझेदारी)।
डिफेंस एक्सपो-2020 के उद्घाटन के अवसर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह आयोजन भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के हमारे संकल्प की अभिव्यक्ति है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी। सरकार के माध्यम से यह 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है।
मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के अपने प्रयासों पर राजनाथ ने कहा कि लाइसेंस और खरीद के नियमों को सरल बनाया है। सिंगल विंडो सिस्टम स्थापित कर दिया है। लगातार बुनियादी ढांचा दुरुस्त कर रहे हैं। यूपी और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरीडोर बना रहे हैं। मेक इन इंडिया, स्टार्टअप और स्किल इंडिया जैसी योजनाएं लाए हैं। इस तरह से हम नए सुनहरे भविष्य वाले भारत की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
राजनाथ ने कहा कि हम रक्षा उत्पादों में अधिकाधिक स्वदेशी तकनीक को अपना रहे हैं। नवाचार के साथ ही उत्पादों के निर्यात पर विशेष जोर है। 17 हजार करोड़ रुपये मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया है। करीब 50 कंपनियां इस काम में अपना योगदान दे रही हैं। ऑफसेट पॉलिसी के साथ निवेश बढ़ा रहे हैं। अगले पांच वर्षों में भारत के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राजनाथ ने कहा कि दुनिया के मित्र देशों के साथ हमारा विक्रेता और खरीददार का ही संबंध नहीं है, बल्कि उससे कहीं अधिक मजबूत हमारे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अलग-थलग रहकर काम नहीं चल सकता है। अपनी क्षमता और ताकत का इस्तेमाल करते हुए साझेकारी बढ़ाने का समय है। आज सप्लाई चेन पूरी तरह से वैश्विक हो चुकी है। दुनिया के लिए भारत रक्षा क्षेत्र में फैसिलिटेटर की भूमिका में है। डिजिटल आवश्यकताओं को भी पूरा करने की जरूरत है।
कृत्रिम इंटेलीजेंस और रक्षा तकनीक में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। राजनाथ ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरवाद की विचारधारा को हराने में दुनिया को भारत का साथ देना चाहिए। भारत के साथ रक्षा सौदे करने वाले देशों को हभी इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने दुनिया के देशों से मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने में मदद का आह्वान किया। राजनाथ ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अधिकाधिक नवाचार के लिए जरूरी है कि इससे युवाओं को जोड़ा जाए। इस मौके पर उन्होंने लखनऊ की तहजीब की भी तारीफ की।