लखनऊ। गैस की किल्लत के चलते कुछ समय पहले होटल और ढाबा संचालकों ने खानपान की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए थे। अब स्थिति सामान्य होने के बाद भी बढ़े हुए दाम घटाए नहीं जा रहे हैं। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है।जब गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई थी तो होटल व्यवसायियों का कहना था कि गैस मिल नहीं रही है। ऐसे में लकड़ी और कोयले से काम चलाना पड़ रहा था, जिससे मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े। अब पहले की तरह सिलिंडर की आपूर्ति शुरू होने के बाद भी लोगों से बढ़े हुए दाम ही वसूले जा रहे हैं। खुर्रम नगर स्थित होटल पर चस्पा पोस्टर पर एक पराठे का दाम 15 रुपये लिखा है। संचालक गौस रजा ने बताया कि गैस सिलिंडर की किल्लत शुरू होने से पहले वह 10 रुपये का एक पराठा बेचते थे। गैस किल्लत के बाद उन्हें कोयले और लकड़ी का सहारा लेना पड़ा। लागत बढ़ने के कारण उन्हें रेट बढ़ाने पड़े। इसी क्षेत्र के एक अन्य होटल संचालक हसीन के यहां अभी भी रुमाली रोटी आठ रुपये में मिल रही है, जबकि गैस किल्लत से पहले इसकी कीमत छह रुपये थी। इसी तरह चाय का कप 10–12 रुपये से बढ़कर 15–20 रुपये हो गया है, लेकिन अब तक इसमें कोई कमी नहीं आई है। कई ढाबों पर थाली की कीमत 100-120 रुपये से बढ़ाकर 150–160 रुपये कर दी गई थी, इसके भी दाम नहीं घटे हैं। ग्राहकों का कहना है कि जब सिलिंडर की समस्या खत्म हो गई है तो दाम भी कम होने चाहिए। वहीं, होटल संचालकों का तर्क है कि सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि सब्जी, तेल और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें भी बढ़ी हुई हैं, इसलिए दाम घटाना संभव नहीं है।