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Lucknow News: ट्रांसफार्मरों के तांबे, तेल पर हाथ साफ कर रहा गैंग, लेसा को अब तक लगी 20 लाख की चपत

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चोरों ने ट्रांसफार्मर का सिर्फ ढांचा छोड़ा
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नरेश शर्मा



लखनऊ। राजधानी में ट्रांसफार्मर के तांबे के कॉइल व अन्य पार्ट्स, तेल चोरी कर उसे खोखा बना देने वाला गैंग सक्रिय है। यह कई इलाकों में बिजली संकट भी पैदा कर रहा है।



बीते सात दिनों में वृंदावन योजना की अवध विहार कॉलोनी व सेक्टर-18, काकोरी के शाहपुर और इमलिहा में चार 250 केवीए ट्रांसफार्मर को चोर निशाना बना चुके हैं। मामले में बिजलीकर्मी भी संदेह के घेरे में हैं। परेशान लेसा ने जांच कमेटी गठित करने के साथ गैंग को पकड़वाने के लिए डीएम को पत्र लिखा है।
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250 केवीए के ट्रांसफार्मर की कीमत करीब पांच लाख रुपये होती है। ऐसे में सात दिनों में ही गैंग लेसा को करीब 20 लाख रुपये की चपत लगा चुका है। चोर ट्रांसफार्मर के अंदर का पूरा हिस्सा निकाल ले जाते हैं। उसकी सिर्फ बॉडी बचती है। 250 केवीए के एक ट्रांसफार्मर से कम से कम 200 घरों को बिजली मिलती है। दूसरा ट्रांसफार्मर लगने तक इन परिवारों को परेशानी उठानी पड़ती है।



तकनीकी रूप से सक्षम व जानकार है गैंग



लेसा के अफसरों का कहना है कि 11 हजार वोल्ट के करंट को गैंग रिंग मेंस यूनिट से बंद करता है। 11 हजार वोल्ट की ओवरहेड लाइन के फेज, अर्थ, न्यूट्रल वाले तार को प्लास्टिक की रस्सी के सहारे आपस में मिला देता है। प्लास्टिक की रस्सी में पत्थर बांधकर लाइन पर फेंकता है। इन तरीकों से साफ है कि गैंग से जुड़े लोग तकनीकी रूप से सक्षम और जानकार हैं। ये करंट बंद करने के लिए वही तरीका अपना रहे हैं, जो उपकेंद्र के कर्मचारी अपनाते हैं।



उपकेंद्र ऑपरेटरों पर भी उठ रहे सवाल



11 हजार वोल्ट की लाइन को ट्रिप यानी बंद करने पर उपकेंद्र के कंट्रोल रूम में जोरदार धमाका होता है। जो फीडर ट्रिप होता है उपकेंद्र का ऑपरेटर उसे फिर से चालू करता है, लेकिन इन मामलों में ऐसा नहीं हुआ। जानकारों का कहना है कि ट्रिपिंग के 10 से 20 मिनट बाद ही फीडर को दोबारा चालू कर दिया जाए तो सप्लाई चालू हो जाएगी। इससे ट्रांसफार्मर चोरी होने से बच सकता है।



विभागीय लोगों की संलिप्तता जांचेगी कमेटी



मामले की जांच के लिए अमौसी जोन के मुख्य अभियंता रजत जुनेजा ने कमेटी बनाई है। इसमें अधीक्षण अभियंता गुरजीत सिंह, अधिशासी अभियंता मिथिलेश कुमार व अमित आनंद शामिल हैं। कमेटी ट्रांसफार्मर चोरी के मामलों में विभागीय लोगों की संलिप्तता का पता लगाएगी। ट्रिपिंग के बाद फीडरों को दोबारा चालू नहीं किए जाने की भी कमेटी जांच करेगी।



...इसलिए गैंग के निशाने पर ट्रांसफार्मर



- 250 केवीए के एक ट्रांसफार्मर में 200 से 225 किलो तांबे के कॉइल और 230 लीटर तेल होता है। तांबे की कीमत 1.50 लाख रुपये होती है। तेल 20 से 23 हजार रुपये का होता है। इसके साथ ही अन्य कीमती पार्ट्स होते हैं।



- तांबा इस समय 600 रुपये प्रति किलो में मिल रहा है। ट्रांसफार्मर के तेल की कीमत 90 से 100 रुपये प्रति लीटर है।



चोरी का माल यहां खपाने का संदेह



- टैंपो, डीजल इंजन में ट्रांसफार्मर के तेल का इस्तेमाल होता है। चोरी किया तेल 50 रुपये प्रति लीटर तक में मिल जाता है, जबकि डीजल करीब 88 रुपये प्रति लीटर है।
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- तांबे के कॉइल ट्रांसफार्मर बनाने और उसकी मरम्मत करने वाले भी खरीदते हैं।



(नोट : सभी तथ्य जानकारों के अनुसार)



कोट्स



खतरे में पड़ रही बिजली आपूर्ति व्यवस्था



ट्रांसफार्मर को क्षतिग्रस्त कर उसके तांबे के कॉइल और तेल को निकालने वाला गैंग सक्रिय है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। डीएम को पत्र लिखकर गैंग को पकड़वाने की मांग की गई है।



- रजत जुनेजा, मुख्य अभियंता, अमौसी जोन, लेसा
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