लखनऊ। जमीन विवाद में तिहरे हत्याकांड के मामले में पैमाइश कराने पहुंचे लेखपाल के अलावा एक अन्य लेखपाल की बड़ी भूमिका रही है। वह लेखपाल मसूद का करीबी है। उसी ने सांठगांठ कर मीठेनगर के लेखपाल को पैमाइश के लिए भेजा। चूंकि पूरे मामले में खेल किया जा रहा था इसलिए न पुलिस को सूचना दी गई और न ही प्रशासन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को। इस खेल और लापरवाही की वजह से ही इतनी बड़ी वारदात हो गई।
तैयब के भाई मसूद मलिहाबाद में ही रहते हैं। मसूद की तमाम जमीन मलिहाबाद में है। वहां का एक लेखपाल उनका करीबी है। सूत्रों के मुताबिक पैमाइश कराने के लिए उसी लेखपाल ने मीठेनगर के लेखपाल रघुवीर सिंह यादव से बातचीत कराई थी। इस पर रघुवीर पैमाइश के लिए तैयार हो गया था। विवादित मामला होने के बावजूद पुलिस व प्रशासन के अफसरों को सूचना न देने के पीछे की वजह यही है कि लेखपाल सांठगांठ की वजह से पैमाइश करने पहुंचा था। अगर वह पैमाइश करने न जाता तो न ही दोनों पक्ष एकसाथ जुटते और न विवाद होने पर तीन लोगों की हत्या होती। फिलहाल प्रशासन की तरफ से अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश जारी है।
जब पैमाइश की कार्रवाई की जाती है तो पुलिस बल के लिए संबंधित थाने को लिखित सूचना देनी होती है। इसके साथ ही राजस्व निरीक्षक और नायब तहसीलदार की भी मौजूदगी रहती है। मगर मामले में राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार को कोई जानकारी नहीं थी। इससे भी लेखपाल की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वारदात के बाद पुलिस अफसरों का स्पष्ट कहना था कि पैमाइश के दौरान विवाद हुआ और फिर वारदात को अंजाम दिया गया। मगर प्रशासन का दावा इससे पूरी तरह से इतर है। प्रशासन का दावा है कि वारदात पारिवारिक विवाद में की गई। जमीन विवाद में घटना नहीं हुई। जबकि जो रंजिश थी वह जमीन विवाद की वजह से ही थी। एक तरह से प्रशासन पल्ला झाड़कर अपने जिम्मेदारों खासकर लेखपाल को बचाने की कवायद में जुटा है।