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Lucknow News: बच्चों का भविष्य संवारा तो स्कूल भी बना दिया सुंदर

Mon, 04 Sep 2023 06:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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शिक्षक दिवस पर विशेष
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परिषदीय स्कूलों के शिक्षक बेहतर शिक्षा देने की कर रहे कोशिश, बटोरीं ढेरों उपलब्धियां
पुरस्कार के लिए किए आवेदन, पर नहीं मिल सकी सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली। जिले में कई ऐसे शिक्षक हैं, जिनका प्रयास वाकई तारीफ के काबिल है। विद्यालय को संवारना हो या फिर बच्चों का भविष्य बनाना, शिक्षक कोई कमी नहीं रख रहे हैं। शिक्षकों के इसी प्रयास के चलते बच्चों की रुचि पढ़ाई के प्रति बढ़ी है तो इसी प्रयासों की बदौलत छात्र-छात्राओं ने नाम भी रोशन किया है। विद्यालय का परिवेश देख प्राइवेट स्कूलों के बच्चे भी परिषदीय विद्यालय में प्रवेश लेते हैं। अच्छा प्रयास करने और ढेरों उपलब्धियां पाने के बाद ऐसे ही आठ अध्यापकों ने राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन भी किए, लेकिन पुरस्कार के लिए सिर्फ एक अध्यापक चयनित हुआ। सफल न होने वाले शिक्षक निराश नहीं हैं, बल्कि और ज्यादा बेहतर करने की बात कहते हैं। शिक्षकों का मानना है कि उनका सपना विद्यालय को सबसे अच्छा बनाना और बच्चों का भविष्य संवारना है। अपने इस मकसद से वे कभी पीछे नहीं हटेंगे।
इनसेट
बदहाल विद्यालय चमका, बच्चों की संख्या ढाई गुना
फोटो संख्या 16
प्राथमिक विद्यालय हरदासपुर की प्रधानाध्यापिका मीनी तिवारी ने पांच सालों में स्कूल ही हालत ही बदल डाली। जो स्कूल कभी बदहाल हुआ करता था, वह किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है। यही वजह है कि यहां छात्र संख्या बढ़ी। वर्ष 2018 में 190 बच्चे थे, जो अब बढ़कर 500 से ज्यादा हो गए हैं। विद्यालय का परिवेश देख आसपास के गांवों से भी बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। वर्ष 2018 से विद्यालय में काम कर रही मीना तिवारी ने राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए लगातार दूसरी बार आवेदन किया था। जिले स्तर से चयनित हुआ, लेकिन राज्य स्तर पर सफलता नहीं मिल सकी। यह स्कूल 1930 से संचालित है। हर रोज प्रार्थना के समय 15 मिनट मीना तिवारी बच्चों को सामान्य ज्ञान की जानकारी देती हैं। ढेरों संसाधन अपने व्यक्तिगत प्रयास से उपलब्ध कराए हैं।
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स्कूल की बंजर भूमि बनी उपजाऊ, लगाए पेड़-पौधे
फोटो संख्या 30
प्राथमिक विद्यालय पूरे जमुनिहा की इंचार्ज प्रधानाध्यापक प्रीति वर्मा ने स्कूल की बंजर जमीन को उपजाऊ बना दिया। विद्यालय परिसर हरा-भरा है। किचन गार्डन बनाया गया। वर्ष 2016 से विद्यालय में काम कर रही प्रीति वर्मा ने विभिन्न नवाचारों के माध्यम से शिक्षण कार्य को बेहतर बनाया। यही वजह है कि यहां बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ उपस्थिति 90 फीसदी रहती है। विद्यालय के बच्चे जिले से लेकर प्रदेश स्तर पर कई बार पुरस्कार जीत चुके हैं। प्रीति वर्मा कई बार सम्मानित हो चुकी हैं। इसी साल जुलाई में अभिनव प्रयास एवं नवाचार के लिए विद्यालय को सम्मान मिल चुका है। ऐन वक्त पर राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन किया, लेकिन चयनित नहीं हो सकीं।
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कॉमिक बुक निर्माण समेत लिख चुकी तीन पुस्तकें
फोटो संख्या 12
उच्च प्राथमिक विद्यालय पहरेमऊ की सहायक अध्यापिका प्रीति सक्सेना अपने स्कूल में आईआईटी गांधी नगर पैटर्न पर शिक्षा देती हैं। विद्यालय की वेबसाइट बनाकर आईसीटी आधारित शिक्षा भी दे रही हैं। विशेष कक्षाओं के संचालन से आठ बच्चों का चयन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुआ है। बच्चों के लिए उपयोगी तीन पुस्तकें लिख चुकी हैं, जिनमें कॉमिक बुक, ज्ञान का यान विज्ञान, बच्चों में संप्रेषण एवं बाल मन की समझ नामक पुस्तकें शामिल हैं। राज्य स्तरीय स्वरचित कविता लेखन, वीडियो निर्माण एवं आदर्श पाठ योजना निर्माण में प्रीति का चयन हो चुका है। जिले से लेकर प्रदेश तक कई बार सम्मान मिल चुके हैं। राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पहली बार आवेदन किया, लेकिन चयनित होने में सफल नहीं हो सकीं। बेहतर शिक्षा देने का प्रयास निरंतर कर रही हैं।
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