लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में अब हर माह होने वाली पैरेंट्स टीचर मीटिंग की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जाएगी। मीटिंग के दौरान अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई से जुड़े किस बिंदु पर चर्चा होगी इसका भी प्रधानाध्यापकों को लेखा जोखा रखना होगा।
बीएसए ने बताया कि सरकारी स्कूलों में अब विद्यालय प्रबंध समितियों और अभिभावकों की बैठकों के नाम पर केवल कागजी खानापूरी नहीं चलेगी। शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कदम उठाए हैं। विद्यालयों में नई समितियों के पुनर्गठन करने के साथ-साथ उनकी डिजिटल ट्रैकिंग भी की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इसका उद्देश्य विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर करना है।
अभिभावकों से हर माह संवाद पर जोर
निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों और अभिभावकों के बीच हर महीने नियमित संवाद होगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई की प्रगति पर गहनता से ध्यान केंद्रित करना और किसी भी समस्या का समय रहते समाधान खोजना है। विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकों का एजेंडा और लिए गए निर्णयों को भी डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा, जिसकी निगरानी बीएसए करेंगे।
ये होंगे फायदे
पारदर्शिता: बैठकों और समितियों की गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी।
जवाबदेही:
संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी।
प्रभावी निगरानी: बीएसए स्तर पर समितियों के कामकाज की प्रभावी निगरानी संभव होगी।
सुधार की दिशा: नियमित संवाद से बच्चों की शिक्षा में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
कोट........
स्कूलों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार प्रबंध समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और शिक्षकों के साथ नियमित संवाद बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि बैठकों का आयोजन केवल औपचारिकता न बनकर, शैक्षिक सुधार के लिए एक प्रभावी मंच बने।
विपिन कुमार- बीएसए