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Lucknow News: शहर में बनने जा रहा है पहला बायो सीएनजी प्लांट

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बायो सीएनजी प्लांट स्थल का निरीक्षण करते नगर आयुक्त गाैरव कुमार। 
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लखनऊ। सब्जी मंडियों से निकलने वाले कचरे और गोबर के निस्तारण समस्या एक वर्ष में समाप्त हो जाएगी। इसके लिए शहर का पहला बायो सीएनजी प्लांट बनने जा रहा है। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले इस प्लांट के लिए नगर निगम ने सरोजनीनगर क्षेत्र में निजी कंपनी को जमीन आवंटित की है। बुधवार को राज्यपाल इसके निर्माण के लिए शिलान्यास करेंगी।



प्लांट में कान्हा उपवन के गोवंशों का गोबर उपयोग कर सीएनजी गैस बनाई जाएगी। अभी कान्हा उपवन में करीब 10 हजार गोवंश हैं। भविष्य में यह संख्या और बढ़नी है, क्योंकि नगर निगम अयोध्या रोड पर मनोरथा गोशाला भी बना रहा है। इसकी क्षमता करीब पांच हजार गोवंश की होगी। यह छह महीने में शुरू होने वाला है। इससे बनने के बाद प्लांट के लिए गोबर की कमी नहीं रहेगी। अभी गोबर निस्तारण बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए बायो डाइजेस्टर बनाया गया है, मगर पशुओं की तादाद बढ़ने पर उसमें पूरे गोबर का निस्तारण कठिन होगा।
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प्लांट में सड़ने वाले कचरे का भी उपयोग किया जाएगा। अभी इसका निस्तारण सही से नहीं हो पाता है। इसे देखते हुए अब नगर निगम बायो सीएनजी प्लांट लगाने जा रहा है। इसका निर्माण एक साल के अंदर पूरा होना है।
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हर दिन 10 टन बनेगी सीएनजी

नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि प्लांट में हर दिन 200 टन गोबर और हरे कूड़े का निस्तारण हो सकेगा। इससे हर रोज 10 टन सीएनजी और करीब 60 टन खाद बनेगी। प्लांट लगाने पर करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जो निजी कंपनी जेबीएम खर्च करेगी। नगर निगम जो गोबर देगा, उसका पैसा भी कंपनी देगी। नगर निगम ने प्लांट के लिए अमौसी में साढ़े सात एकड़ भूमि 20 वर्ष के लिए लीज पर दी है।



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सीबीजी प्लांट लगने से गोबर की बड़ी समस्या हल हो जाएगी। फल और सब्जी मंडियों से निकलने वाले हरे कचरे का निस्तारण भी उसी दिन हो सकेगा।

- गौरव कुमार,
नगर आयुक्त
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