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Lucknow News: गहरे समुद्री जैव संसाधनों की खोज से बढ़ेगी ब्ल्यू इकॉनमी की रफ्तार

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राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में हुआ कार्यक्रम। 
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लखनऊ। गहरे समुद्र की मछलियों के अंगों से विकसित की गई छह नई सेल लाइन (कोशिकाएं) समुद्री जैव-संसाधनों की खोज, उनके संरक्षण व देश की ब्ल्यू इकॉनमी को रफ्तार देने में सहायक होंगी। यह गहरे समुद्र की जैव विविधता पर अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है, जिसकी अभी तक खोज नहीं हुई है। यह बातें इन कोशिकाओं के लॉन्चिंग के दौरान नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज कोच्चि के निदेशक डॉ. काजल चक्रबर्ती ने कहीं।
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शुक्रवार को तेलीबाग स्थित राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में हुए कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज कोच्चि की ओर से हुए कार्यक्रम में इन कोशिकाओं का प्रदर्शन हुआ। मुख्य अतिथि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन ने कहा कि यह हमारे डीप ओसियन (गहरे समुद्री) मिशन परियोजना का परिणाम है। इस दौरान कई एमओयू भी साइन हुए। डीप ओशन मिशन के निदेशक डॉ. एमवी रमनामूर्ति, इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओसियन इंफॉर्मेशन सर्विसेज के निदेशक डॉ. टीएम बालकृष्णन नायर और सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी के निदेशक डॉ. आरएस महेशकुमार मौजूद रहे।

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में हुआ कार्यक्रम। 

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में हुआ कार्यक्रम। 

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