प्रवेंद्र गुप्ता
नगर निगम में आशुलिपिक रहे राजेश की करीब डेढ़ माह पहले कोरोना संक्रमण के दौरान मौत हो गई। राजेश की पत्नी भी उसी दौरान संक्रमित हो गई।
ऐसे में उनके परिवार से न तो कोई राजेश के देयक के लिए आया और न पत्नी ने नौकरी के लिए आवेदन किया। इस पर नगर निगम अधिष्ठान विभाग ने खुद कर्मचारियों के जरिये उनके यहां से नौकरी के लिए आवेदन मंगाया। इसी तरह करीब दर्जन भर आश्रितों से संपर्क कर आवेदन मांगे हैं।
कोराना की दूसरी लहर के दौरान 21 सफाई कर्मियों की मौत हुई। उनके आश्रितों को नौकरी दी जानी है, लेकिन नगर निगम के प्रयास के बाद भी अब तक 11 आश्रितों ने ही आवेदन किए हैं।
10 परिवारों ने मांगने के बाद भी अभी तक आवेदन नहीं किए हैं। निगम प्रशासन ने संवर्ग के कर्मचारी संगठनों से भी इसके लिए प्रयास करने को कहा है, ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सके।
कोरोना की दूसरी लहर में नगर निगम में पिछले दो महीने में 41 कर्मचारियों की मौत हुई। इसमें लिपिकीय संवर्ग में 20 और सफाई सवंर्ग में 21 कर्मचारियों ने जान गंवाई।
इनके आश्रितों को जल्द से जल्द नौकरी दी जानी है। इसे लेकर शासन का सख्त आदेेश है। परिवार टूटने के गम और कोरोना संक्रमण की वजह से ज्यादातर आश्रित नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं करने आ रहे हैं।
ऐसे में नगर निगम प्रशासन को घर से आवेदन मंगाने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी 10 परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया। यही स्थिति उनके देयर लेने को लेकर भी है।
इसके लिए भी कर्मचारियों के जरिए उनके घर तक उनके देयकों की चेक पहुंचवाने की कोशिश की जा रही है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी सुनील रावत ने बताया कि सफाई संवर्ग में कई बार प्रयास करने के बाद भी 11 आवेदन आश्रितों ने ही आवेदन किया है। 10 आवेदन आने बाकी हैं।
इसी तरह लिपिकीय संवर्ग में 20 कर्मचारियों की मौत के मामले में करीब दर्जन भर आवेदन अधिष्ठान विभाग को प्रयास कर मंगाने पड़े।
हालांकि, अब लिपिकीय सवंर्ग में सिर्फ एक ही लिपिक छाया बाजपेयी का परिवार का बचा है। छाया अविवाहित थीं, ऐसे में अभी तक उनके परिवार से कौन नौकरी में आएगा, यह तय नहीं हो सका है।
अब तक मिल चुके आवेदनों की जांच के बाद नियुक्ति की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। 13 आवेदनों को सीएमओ के यहां मेडिकल फिटनेस के लिए भी भेजा जा चुका है।
ये वजह भी हो सकती है
सफाई संवर्ग में आवेदन कम आने को लेकर जानकारों का कहना है कि एक तो सफाई संवर्ग में ज्यादातर परिवार में अधिकांश लोग नौकरी में हैं। दूसरी वजह यह भी है कि किसको आश्रित के तौर पर नौकरी मिले, यह भी परिवारों को तय करने में समय लगता है। एक सफाई कर्मचारी नेता ने बताया कि कोई यह नहीं चाहता कि उसका बच्चा झाड़ू लगाए। आज के बच्चे भी झाड़ू नहीं लगाना चाहते।
जल्द पूरी की जानी है प्रक्रिया
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि मृतक आश्रितों को जल्द से जल्द नियुक्ति दी जानी है। जिन आश्रित परिवारों से आवेदन नहीं आए हैं, वहां पर संपर्क कर आवेदन लिए जाएं और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए। सफाई संवर्ग के कर्मचारी नेताओं से भी कहा गया है कि जिन परिवारों ने आवेदन नहीं दिया है, आवेदन कराने में सहयोग करें।