लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर की सीटी स्कैन मशीन दूसरे दिन भी ठीक नहीं हो सकी। इसकी वजह से गंभीर मरीजों को जांच के लिए मुख्य परिसर के साथ ही निजी सेंटर जाना पड़ा।
ट्रॉमा सेंटर में लखनऊ के साथ ही पूरे प्रदेश भर से गंभीर मरीज आते हैं। विशेष रूप से ब्रेन हैमरेज और सड़क दुर्घटना वाले मरीजों की सीटी स्कैन जांच करानी होती है। ट्रॉमा में इस समय एक सीटी स्कैन मशीन लगी है। मशीन से रोजाना 150 से अधिक मरीजों की जांच होती है। यह मशीन भी रविवार शाम को खराब हो गई। इसके बाद से मरीजों की जांच में समस्या हो रही है।
परिसर में लगी सीटी स्कैन मशीन से जांच के लिए मरीज भेजे जा रहे हैं लेकिन सभी मरीज वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। काफी मरीजों को इसकी वजह से निजी सेंटर भी ले जाना पड़ रहा है। शताब्दी भवन में लगी सीटी स्कैन मशीन पर पहले से ही काफी दबाव है। ऐसे में हर जगह वेटिंग भी बढ़ गई है।
दो इंजीनियर नहीं ठीक कर पाए मशीन
ट्रॉमा सेंटर की सीटी स्कैन मशीन को ठीक करने के लिए दो इंजीनियर रविवार से जुटे हुए हैं। सोमवार को भी ये इंजीनियर मशीन ठीक करने का प्रयास करते रहे लेकिन दुरुस्त नहीं कर सके।
जांच न होने से निजी अस्पताल जाने को मजबूर मरीज
सिर की चोट वाले मरीजों के इलाज की दिशा सीटी स्कैन जांच के बाद ही तय होती है। जांच न होने से तीमारदार अपने मरीजों को निजी अस्पताल लेकर जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब यहां इलाज ही शुरू नहीं हो पा रहा है तो फिर भर्ती कराने का फायदा ही क्या है।
डेढ़ घंटे बाद आ रहा नंबर
ट्रॉमा सेंटर की सीटी स्कैन मशीन खराब होने की वजह से गंभीर मरीजों को भी इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य रूप से सिर की चोट वाले घायलों का इलाज जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। ऐसा न होने पर नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। इस समय जांच के लिए दूसरी जगह जाने की वजह से गंभीर घायलों का भी नंबर डेढ़ घंटे बाद आ रहा है।
प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, इंजीनियर मशीन ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं। गंभीर मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर शताब्दी भवन और मुख्य परिसर वाली मशीन से कराई जा रही है।