मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता।
- फोटो : पीटीआई
चुनाव आयोग अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आयोग उन पांच प्रमुख राज्यों में एक साथ मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विशेष कार्यक्रम जारी करेगा, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं।
चुनाव से पहले होने वाला यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पुनरीक्षण कार्यक्रम होगा, जिसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान मतदाता सूची में मौजूद हर प्रकार की विसंगति, जैसे नाम या पते की स्पेलिंग में गलतियां, दोहरे नाम और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नामों का निपटारा कर उन्हें ठीक किया जाएगा।
ये भी पढ़ें - यूपी: प्रदेश में थानों का होगा कायाकल्प, बनाए जाएंगे अलग विवेचना कक्ष, पुलिसकर्मियों को मिलेंगे हॉस्टल और बैरक
ये भी पढ़ें - अयोध्या: सुबह नौ से रात नौ बजे तक राम मंदिर परिसर में रहेंगे सीईओ, कर्मियों से बैठक कर जानी व्यवस्थाएं
इसके साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं के नाम जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी विधानसभा चुनावों में कोई भी पात्र नागरिक वोट देने से न छूटे और मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिरहित रहे। साथ ही अगर नाम गलत ढंग से शामिल हो गए हैं तो उन्हें काटा जाएगा।
यहां बता दें कि चुनाव आयोग ने वर्तमान में एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता रखे जाने का प्रावधान किया है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर एक बूथ पर 900-1050 मतदाता रखने के लिए ही कहा गया है। इसके पीछे की मंशा यह है कि अगले पुनरीक्षण के बाद नाम बढ़ें तो भी मतदाताओं की अधिकतम सीमा पार न हो।