फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: शुरू हुई ठंड की मार, खल रहा स्वेटर का इंतजार

Sun, 24 Nov 2024 04:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग भले ही बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे करता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। कहने को अप्रैल में नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ, लेकिन सात महीने बीतने के बाद भी जिले के 30 हजार से अधिक बच्चों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत धनराशि नहीं मिली है। अब जब ठंड की मार शुरू हो गई है, ऐसे में बच्चों को स्वेटर का इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


डीबीटी में 1200 रुपये प्रति छात्र मिलते हैं, जिससे यूनिफाॅर्म, स्वेटर, जूता-मोजा, स्टेशनरी आदि खरीदना होता है। ऐसे में इन बच्चों के पास स्वेटर या जूता-मोजा खरीदने के पैसे नहीं है। जिन बच्चों को पहले धनराशि मिल चुकी हैं, उनमें भी ज्यादातर लोगों ने अब तक स्वेटर या जूता-मोजा नहीं खरीदा है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों में काफी संख्या में बच्चे बिना यूनिफाॅर्म, स्वेटर और जूता-मोजा के नजर आते हैं। विभागीय अधिकारी या शिक्षक इस पर कोई ध्यान नहीं देते हैं।

जिले में 2299 परिषदीय विद्यालय हैं। कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों की संख्या दो लाख 18 हजार 738 है। इनमें एक लाख 88 हजार 609 बच्चों को ही डीबीटी के तहत धनराशि भेजी गई है। ये बच्चे भी अलग-अलग चरणों में लाभान्वित हुए हैं। अब भी 30 हजार से अधिक बच्चों को डीबीटी के तहत धनराशि नहीं मिली है।
विज्ञापन


इनमें 13 हजार से अधिक बच्चों के पास आधार नहीं हैं, जिससे उनका सत्यापन कार्य शुरू नहीं हो सका है। बगैर आधार के इन्हें लाभ मिल पाना संभव नहीं है। बाकी बच्चों के मामले में विद्यालय, ब्लॉक और जिला स्तर पर लंबित हैं।


ऊंचाहार : कई बच्चों के पास यूनिफॉर्म नहीं
रायबरेली। ऊंचाहार विकास क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में अब भी 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें अब तक डीबीटी के तहत धनराशि नहीं मिली है। ऐसे में इन बच्चों ने यूनिफाॅर्म, स्वेटर, जूता-मोजा नहीं खरीदा है। जिन्हें धनराशि मिल गई है, उनमें ज्यादातर बच्चे स्वेटर व जूता-मोजा पहनकर नहीं आते हैं।

मुस्तफाबाद स्थित विद्यालय में 284 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें 170 बच्चे ही लाभान्वित हुए हैं। यहां ज्यादातर बच्चे यूनिफाॅर्म के बजाय घर के कपड़े पहने दिखे। प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंजू यादव ने बताया कि बिना आधार कार्ड वाले बच्चों का भुगतान होना बाकी है। अभिभावकों को समझाया जा रहा है कि बच्चों को फुल ड्रेस में स्कूल भेजें।



ठंड में चप्पल पहनकर आते हैं नौनिहाल
बछरावां। सुबह कोहरे की धुंध छाई रहती है। ठंड भी रहती है। इसके बावजूद स्कूल जाते समय ज्यादातर नौनिहाल चप्पल में नजर आते हैं। पैसा मिलने के बाद भी स्वेटर नहीं खरीदे हैं। जिन्हें पैसा नहीं मिला है, वे डीबीटी के तहत धनराशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अभिभावक चंद्र किशोर, राजू, रामशरण, गंगा सेवक ने बताया कि उनके बच्चों को अभी डीबीटी के तहत धनराशि नहीं मिली है।

ऐसे में कैसे बच्चों को स्वेटर या जूता-मोजा पहनाएं। बीईओ का कहना है कि लगभग 13 हजार बच्चों को धनराशि भेजी जा चुकी है। लगभग 1200 बच्चे अभी डीबीटी से वंचित हैं। इनके पास आधार या अन्य दस्तावेज न होने के कारण सत्यापन नहीं हो सका है।


वर्तमान में लगभग पांच हजार बच्चों का सत्यापन पूरा हो गया, जिन्हें अगले हफ्ते लाभ मिल जाएगा। बाकी बच्चों का सत्यापन शीघ्र कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है।
विज्ञापन

- शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें