लखनऊ। अलीगंज की जिस अवैध बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई, उस पर अब तक बुलडोजर चल चुका होता, मगर एलडीए के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण अभी ऐसा नहीं हो पाया है। इसके लिए इंतजार किया जा रहा है, क्याेंकि 10 साल पहले इसी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण आदेश एलडीए ने खुद ही निरस्त कर दिया था।
ऐसे में एक तरह से एलडीए ने बिल्डिंग को वैध कर दिया गया था। इसी कारण एलडीए अभी तक ध्वस्तीकरण का आदेश जारी नहीं कर पाया है। जो नोटिस 23 जून को एलडीए की ओर से जारी हुआ था, वह अभी अवैध निर्माण पर कारण बताओ नोटिस भर है। इस पर सुनवाई होने के बाद ही एलडीए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर पाएगा। भवन निर्माण उपविधि के नियमों के तहत अवैध निर्माण की शिकायत पर एलडीए पहले धारा 27(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करता है और विहित न्यायालय में वाद दायर करता है। इसमें 15 दिन का मौका सुनवाई के लिए देता है। सुनवाई के बाद एलडीए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करता है।
जिन मामलों में यह नोटिस पहले से जारी रहता है, उसमें अवैध निर्माण को ध्वस्त करने से पहले सुनवाई का मौका देने की बाध्यता नहीं रहती। जानकारों ने बताया कि चूंकि एलडीए अलीगंज सेक्टर-डी में भवन संख्या 102 की बिल्डिंग को एक बार वैध करार दे चुका है, ऐसे में अब कार्रवाई के लिए नोटिस की प्रक्रिया पूरी करना विधिक रूप से जरूरी है।
एलडीए में अटके हैं चार हजार मामले
अवैध निर्माण साबित होने के बाद उन पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई के लिए करीब चार हजार मामले एलडीए के ही विहित न्यायालयों में अटके हैं। इनमें कई मामले ऐसे भी हैं, जो करीब एक साल से लंबित हैं। इससे अवैध निर्माण करने वालों को बढ़ावा भी मिल रहा है। विहित न्यायालय में सुनवाई होने के बाद ही इन पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण आदेश होगा।
Iअवैध निर्माण को लेकर जारी नोटिस का समय पूरा होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। अवैध निर्माण हुआ है, इसकी पूरी रिपोर्ट और साक्ष्य जांच में आ चुके हैं। पूर्व में जिन अफसरों ने गलती की, उन पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।I
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प्रथमेश कुमार, एलडीए वीसीI
अलीगंज अग्निकांड।