लखनऊ। सात दशकों की परंपरा के निर्वहन के क्रम में होली पर होने वाले चौक के प्रसिद्ध कवि सम्मेलन चकल्लस में शनिवार रात खूब ठहाके गूंजे। इस दौरान कविताओं के रंग में सराबोर श्रोता वाह-वाह करते रहे। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित भी किया गया।
अमृत लाल नागर व लालजी टंडन द्वारा स्थापित होलिकोत्सव समिति, चौक की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, एमएलसी मुकेश शर्मा और क्षेत्रीय पार्षद अनुराग मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। शुरुआत प्रेरणा ठाकरे की सरस्वती वंदना से हुई। उन्होंने अपने काव्यपाठ के दौरान देशप्रेम की कविता पढ़कर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने पढ़ा- देश पर उठाई गई आंख फोड़ देंगे हम...। पुलिस विभाग में कार्यरत कवि धर्मराज ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया- नवंबर जस मजा जनवरी मा न पइहव, गद्दा जस मजा दरी मा न पइहव, ठांस के पिस्टल बुलट से चलिहउ, दरोगा जस मजा मास्टरी मा न पइहव...। देश के मशहूर कवि प्रताप फौजदार ने जहां एक ओर अपनी रचनाओं से लोगों को हंसाया तो वहीं राष्ट्रभक्ति का जज्बा भी जगाया। उन्होंने पढ़ा- वफा ईमान की बातें किताबों में नहीं मिलतीं, भरोसा रोज मिलता है, भरोसा रोज डसता है...।
प्रख्यात मिश्रा ने सुनाया- वीरों की ये माटी आज, चलो हल्दी घाटी आज...। वंदना शुक्ला ने पढ़ा- हर बला से बचाती मुझे मेरी मां, सुख का आंचल ओढ़ाती मुझे मेरी मां, लग न जाए जमाने की मुझको नजर, काला टीका लगाती मुझे मेरी मां। प्रवीन चौबे ने हास्य का पुट छोड़ते हुए सुनाया - साली ने जीजा से कहा, जीजाजी मैं पास हो गई मिठाई खिलाओ। जीजा ने साली से कहा, जरूर खिलाऊंगा थोड़ा और पास हो जाओ। विहारी लाल अम्बर ने सुनाया- ले के सब रुपया मेरा एक दिन निकल जाएगी, जाके तनहाई में खुशियों से उछल जाएगी, खाके केले तुम इधर न तुम जरा फेंको, यारों आने वाली है मेरी जान फिसल जाएगी।
राकेश बाजपेई ने सुनाया- अपने ही हाथ-पैर को कटाने पर तुले हैं, फिर से गुलामी की बू सुंघाने पर तुले हैं... सत्ता के लोलुप लोभी, तन-मन-धन से बिक गए... भारत मां को द्रोपदी बनाने पर तुले हैं। अमित अनपढ़ ने पढ़ा - अपने विरोधियों का कर दे बुरा हाल रे कि फूंक फूंक के मंतर मारे बाबा कमाल रे...। अतुल ज्वाला ने सुनाया - पिता के संस्कारों से ज्यादा कुछ भी नहीं उनकी मुस्कुराहट की घड़ी दो घड़ी से ज्यादा कुछ भी नहीं... मैं कितना भी कमा लूं दुनिया से, मेरी कीमत उनकी पगड़ी से ज्यादा कुछ भी नहीं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों का सम्मान
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को अतिथियों की ओर से अंग वस्त्र, पुष्प गुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंटकर अमृत लाल नागर और काशीनाथ बाजपेयी सम्मान से नवाजा गया। महाकुंभ के आयोजन में लखनऊ की ओर से सहभागिता कराने वाले विधायक डॉ. नीरज बोरा, बड़ी संगत के महंत बाबा धर्मेन्द्र दास, पुलिस उपायुक्त विश्वजीत श्रीवास्तव, लखनऊ फायर सर्विस व दुर्गा मंदिर ट्रस्ट के टीटू गर्ग को समाजसेवा के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान समिति के महामंत्री अनुराग मिश्रा, अंजनी श्रीवास्तव, अमरनाथ मिश्रा, हरिप्रसाद अग्रवाल, ओमप्रकाश दीक्षित, डॉ. राजकुमार वर्मा, अजय अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, अतुल गुप्ता, उत्कर्ष अग्रवाल, सोनू अग्रवाल, अनिल गुप्ता, पूर्व पार्षद अनुराग पांडेय, राम अवतार कनौजिया, साकेत शर्मा, डॉ. उमंग खन्ना, सुनील गुप्ता, सुनीत कपूर, पियूष माइती, संकेत मिश्रा, आनंद रस्तोगी, संजीव झींगरन, शैलेन्द्र कक्कर, संजय त्रिवेदी, डीपी सिंह, शैलेन्द्र मिश्रा, आनंद मिश्रा, आशीष मिश्रा, रिषभ बाजपेयी, हिमांशु गर्ग, अनुज मिश्रा, शिवम गुप्ता, अमन तिवारी समेत सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।