साइबर क्राइम पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विजय द्वारकादास पटेल।
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के 120 करोड़ रुपये पार करने के मामले नया खुलासा हुआ है। छानबीन में सामने आया है कि ठगी की रकम हवाला के जरिये खपाई गई थी। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने हवाला का काम करने के आरोप में अहमदाबाद के विजय द्वारकादास पटेल को गिरफ्तार किया है।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव के मुताबिक आरोपी धोखाधड़ी की राशि अपने खाते में लेकर हवाला के माध्यम से समायोजित करता था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अहमदाबाद में उसका हवाला का कारोबार है। वह विभिन्न फर्मों के खातों में आरटीजीएस के माध्यम से रकम मंगाता था। इसके बाद कमीशन लेकर नकद वापस करता था। आरोपी ने बताया कि उसकी अहमदाबाद के हितेंद्र शाह, सुनील त्रिवेदी और सूरत के कपिल वसोया से लगातार बातचीत होती थी। मई 2024 में अहमदाबाद में हुई बैठक में हितेंद्र शाह ने बताया था कि कपिल वसोया का उत्तर प्रदेश में बड़ा फंड आने वाला है, जिसके सेटलमेंट के लिए मदद चाहिए।
सात जून 2024 को हितेंद्र शाह ने आरोपी को बताया कि लखनऊ वाला फंड क्लियर हो गया है और अहमदाबाद के एक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है। करीब एक करोड़ कैश की जरूरत होने पर आरोपी ने एमआई ट्रेडर्स के नाम से एसबीआई का खाता भेजा, जिसमें श्रद्धा एजुकेशनल एंड चैरीटेबल ट्रस्ट से 96 लाख आए। आरोपी ने 35 लाख रुपये अपनी फर्म गैशाला के खाते में ट्रांसफर किए और 61 लाख रुपये कैशमैन सतीश कुमार के माध्यम से नकद निकलवाए। इसके बाद हितेंद्र शाह के कहने पर 60 लाख हवाला के माध्यम से लखनऊ और 30 लाख रुपये सूरत भिजवाए। आरोपी ने शेष राशि कमीशन के तौर पर रख ली थी। आरोपी ने बताया कि एमआई ट्रेडर्स का खाता उसने गुजरात निवासी इद्रिस महबूबभाई मालेक के नाम से खुलवाया था, जिसे वह आरटीजीएस के लेनदेन के लिए इस्तेमाल करता था।
ये है पूरा मामला : एकेटीयू की तरफ से बड़ी एफडी कराई जाती है। जून में एफडी प्रक्रिया होनी थी, जिसमें यूनियन बैंक का मैनेजर बन अनुराग श्रीवास्तव विवि की एफडी प्रक्रिया में शामिल हुआ था। अनुराग ने ही विवि का फाइनेंस ऑफिसर बनकर बैंक से एफडी संबंधी दस्तावेज तैयार किए थे और एकेटीयू के नाम से फर्जी खाता खुलवाया था। पांच जून को एफडी के 120 करोड़ रुपये बैंक के खाते में आए थे। वहां से फाइनेंस ऑफिसर बनकर अनुराग ने एकेटीयू के फेक खाते में ये रकम ट्रांसफर करवा ली थी। इसमें से 100 करोड़ रुपये गुजरात के श्री श्रद्धा ट्रस्ट में ट्रांसफर किए थे। इस मामले में साइबर क्राइम थाने की टीम ने गिरीश चंद्रा, शैलेश रघुवंशी, जोशी देवेंद्र प्रसाद, केके त्रिपाठी, दस्तगीर आलम, उदय पटेल, राजेश बाबू और अनुराग समेत 10 लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था।