लखनऊ। शहर में उधड़ी सड़कें, उनसे उठने वाली धूल, खुले में फेंके जा रहे कूड़े ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में राजधानी को चाैथे से 15वें पायदान पर पहुंचा दिया है। 200 नंबर की इस प्रतियोगिता में लखनऊ को उतने भी नंबर नहीं मिले, जिसके लिए दावा किया गया था।
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में लखनऊ ने 44वें से तीसरे स्थान पर पहुंच बनाई थी, मगर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। जिम्मेदार अफसर रैंकिंग गिरने के पीछे अलग-अलग वजहें बता रहे हैं। सीधे ताैर पर नगर निगम के अलावा परिवहन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के काम में भी कमी सामने आई है। शहर का सबसे खराब प्रदर्शन सड़क धूल प्रबंधन में रहा।
यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमईएफसीसी) की ओर से आयोजित किया जाता है। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क धूल प्रबंधन, वाहन उत्सर्जन नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन में कमी और जन जागरूकता सहित आठ प्रमुख मानकों पर शहरों का मूल्यांकन किया जाता है।
यहां पर पिछड़े हम
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि शहर में हवा की खराब गुणवत्ता और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयाें के कारण वायु गुणवत्ता सर्वेक्षण में अपना शहर पिछड़ा है। सर्वेक्षण कुल 200 अंकों का था। जिसमें 189 अंकों के लिए दावेदारी की गई थी। इतने नंबर मिलते तो अपना शहर सातवें नंबर पर आता। 189 अंकों की दावेदारी इसलिए की गई थी क्योंकि परिवहन विभाग की ओर से पहले ही कह दिया गया था कि अपने शहर में ई वाहन कम हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह दावा गलत साबित हुआ कि शहर में कोई हानिकारक प्रदूषण फैलाने वाली इकाई नहीं है। इस पर नंबर काटे गए। कचरा प्रबंधन में नंबर नहीं कटे हैं।
खुले में डाले जा रहे कूड़े से बिगड़ी हवा
शहर की हवा की सेहत में सुधार न होने पर भी नंबर काटे गए हैं, क्योंकि शहर में खुले में कूड़ा पड़ना कम नहीं हो रहा है। निजी कंपनी लायन इनवायरो जहां कानपुर रोड, आशियाना, राजेंद्र नगर आदि इलाकों में खुले में कूड़े डाल रही है, वहीं रामकी कंपनी यही काम गोमती नगर, अलीगंज सहित पांच जोन में आने वाले इलाकों में कर रही है। इन कंपनियों को कूड़ा निस्तारण प्लांट तक कूड़ा पहुंचाना होता है, लेकिन मार्ग व्यय बचाने के चक्कर में ये कम आबादी वाले इलाकों में कूड़ा फेंक देती हैं।
टूटी और खराब सड़कों से उड़ने वाले धूल भी वजह
शहर के कई इलाकों में सड़कें टूटी या उखड़ी हुई हैं। बारिश के बाद इन सड़कों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। खराब सड़कों से पूरे दिन धूल उठती रहती है जो राहगीरों का चलना भी दुश्वार कर देती है। इसको लेकर संबंधित निकाय और विभाग गंभीर नजर नहीं आते। इसी का परिणाम है कि इस बार लखनऊ की रैंक में 10 पायदान की गिरावट हुई है।
इस बार जो कमियां रह गई हैं, उनको दूर किया जाएगा। अगली बार अपने शहर की रैंकिंग बेहतर आएगी। यह सर्वेक्षण सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से जीता जाएगा।
- संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता नगर निगम
शहर में खराब सड़कों पर उड़ते धूल के गुबार जिसकी वजह से खबरा हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ
शहर में खराब सड़कों पर उड़ते धूल के गुबार जिसकी वजह से खबरा हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ
शहर में खराब सड़कों पर उड़ते धूल के गुबार जिसकी वजह से खबरा हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ
शहर में खराब सड़कों पर उड़ते धूल के गुबार जिसकी वजह से खबरा हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ
शहर में खराब सड़कों पर उड़ते धूल के गुबार जिसकी वजह से खबरा हुई स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ