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शिक्षक बनना है तो जरूर पढ़ें ये खबर

Thu, 26 Sep 2013 11:07 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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बेसिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव के मुताबिक तो वही शिक्षा मित्र स्थायी शिक्षक बनाया जा सकेगा, जो टीईटी पास करेगा।
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इसके बाद भी अन्य राज्यों में शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाने के मामले में अपनाई गई प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा।

यदि किसी राज्य में छूट दी गई है तो इसको आधार मानते हुए राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

शासन में बुधवार को हुई उच्चाधिकारियों की बैठक में यह सहमति बनी है। नियमावली के मुताबिक मोअल्लिम वालों की तर्ज पर शिक्षा मित्रों को भी 62 वर्ष की आयु तक शिक्षक बनने का मौका दिया जाएगा।

देश के अन्य कई राज्यों की अपेक्षा उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 1.76 लाख शिक्षा मित्र हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य कर दिया गया है।
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हाईकोर्ट ने मई 2013 को दिए आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि परिषदीय स्कूलों में टीईटी पास को ही शिक्षक बनाया जा सकता है।

प्रदेश के शिक्षा मित्रों को पत्राचार के माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले चरण के 60 हजार शिक्षा मित्रों का प्रशिक्षण जनवरी 2014 में समाप्त हो रहा है।

इसके बाद इन्हें शिक्षक बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश अध्यापक सेवा नियमावली संशोधित की जाएगी। इसमें शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाने का प्रावधान किया जाएगा।

बेसिक शिक्षा निदेशालय ने नियमावली को संशोधित करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार ने बुधवार को इस संबंध में अधिकारियों की बैठक बुलाई थी।

क्या है प्रस्ताव
बेसिक शिक्षा निदेशालय से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षा मित्र ही स्थायी शिक्षक के तौर पर समायोजित किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने भी यह तय कर दिया है कि 23 अगस्त 2010 के बाद परिषदीय स्कूलों में होने वाली शिक्षकों की भर्ती के लिए अभ्यर्थियों का टीईटी पास करना जरूरी होगा।

शैक्षिक आधार पर बनेगी वरिष्ठता
शिक्षा मित्रों को स्थायी शिक्षक बनाने के लिए शैक्षिक आधार पर वरिष्ठता तय की जाएगी। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और पत्राचार बीटीसी में मिले अंकों के आधार पर गुणवत्ता अंक निर्धारित होगी।
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हाईस्कूल के प्राप्तांक प्रतिशत 10, इंटर 20 व स्नातक के 40 प्रतिशत मानते हुए अंकों को जोड़ा जाएगा। थ्योरी व प्रैक्टीकल परीक्षाएं प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण करने पर दोनों के लिए अलग-अलग क्रमश: 12, 6 और 3 अंक जोड़े जाएंगे।
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