यूपी एटीएस के हाथों लखनऊ में मारे गए आईएस से जुड़े आतंकी सैफुल्ला का शव लेने से पिता सरताज ने इनकार कर दिया। कानपुर के जाजमऊ में रहने वाले सरताज ने कहा कि जो देश का नहीं, वह मेरा बेटा नहीं हो सकता। उसे यही सजा मिलनी चाहिए थी। सैफुल्ला के दो भाइयों ने भी शव को सुपुर्द-ए-खाक करने से इनकार कर दिया।
जाजमऊ के मनोहर नगर में रहने वाले सरताज प्राइवेट नौकरी करते हैं। दो बेटे खालिद और मुजाहिद साथ में रहने के साथ ही टेनरी में प्राइवेट नौकरी करते हैं। छोटा बेटा सैफुल्ला ढाई महीने पहले घर छोड़कर चला गया था।
वह कहां और किसके साथ था, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। पिता ने बताया कि कोई काम-धंधा नहीं करने पर उसे डांटा-मारा था। वह उनकी कोई बात ही नहीं सुनता था। काम-धंधा करने को कहते थे पर वह सुनता नहीं था। इससे उससे चिढ़ हो गई थी। पिता ने बताया कि मंगलवार को वह रिश्तेदारी में शादी में गए थे, वहीं शाम को इस बारे में पता चला था। फिर रिश्तेदारों ने वहीं रोक लिया था।
हाईस्कूल और इंटर 80 फीसदी से पास किया
सैफुल्ला के पिता सरताज ने बताया कि बेटे ने जाजमऊ के जेपीआरएन इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटर 80 फीसदी से अधिक अंकों से पास किया था। मनोहर लाल डिग्री कॉलेज से 2016 में बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद पढ़ाई और काम-धंधा कुछ नहीं करने पर अक्सर डांटता था लेकिन वह सुनता नहीं था।