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सभी दलों की एक ही चिंता, बूथ प्रबंधन हो कैसे पुख्ता

Thu, 26 Sep 2013 11:40 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
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दल अलग-अलग हैं और सभी एक-दूसरे पर हमलावर भी। पर, चुनावी तैयारियों की चिंता सभी की एक जैसी है।
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इससे निजात पाने के लिए राह भी एक जैसी दिख रही है। कोई भी दल बूथों पर हो रही तैयारियों को लेकर संतुष्ट नहीं दिख रहा।

जिला इकाइयां दावा कर रही हैं कि उन्होंने सभी बूथों पर कमेटियां गठित कर दी हैं लेकिन नेतृत्व के पास आने वाली सूचनाएं इन दावों में दरार दिखा रही हैं।

नतीजतन भाजपा हो या बसपा अथवा सपा व कांग्रेस, सभी दल बूथों पर अपनी कमेटियों की स्थिति का सच जान लेना चाहते हैं। इसके लिए किसी ने प्रभारी नियुक्त किए हैं तो कहीं इम्तिहान लेने की तैयारी चल रही है।

भले ही यह अमित शाह के प्रदेश प्रभारी बनने और गुजरात में बेहतर बूथ मैनेजमेंट के चलते पार्टी के लगातार सत्ता में रहने का प्रभाव हो, भाजपा ने इस बार बूथ मैनेजमेंट पर ही पूरा फोकस कर रखा है।
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पार्टी कई बार यह दावा कर चुकी है कि बूथ कमेटियों के गठन का पूरा डाटा कंप्यूटर पर फीड किया जा रहा है। सूबे के ज्यादातर बूथों पर कमेटियां गठित कर ली गई हैं।

बूथ कमेटियों के पदाधिकारियों व सदस्यों के मोबाइल नंबर सहित डाटा बनाया गया है ताकि प्रदेश नेतृत्व और चुनाव प्रबंधन से जुड़े लोग वोट दिलाने व जुटाने वाले लोगों से संपर्क व संवाद रख सकें।

सपा, बसपा और कांग्रेस की तरफ से भी बूथ कमेटियों के गठन के दावे किए जा चुके हैं।

बसपा ने भी भाजपा की तरह बूथ डायरी बनवाई है जिसमें बूथ कमेटियों का पूरा ब्यौरा मोबाइल नंबर सहित दर्ज है। सपा व कांग्रेस ने भी कमोबेश ऐसी ही तैयारियां की हैं। पर, कोई भी अपनी तैयारियों से संतुष्ट नहीं दिख रहा।

भाजपा की बूथ कमेटियों का इम्तिहान
प्रदेश नेतृत्व के दावे के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने बूथ कमेटियों की तैयारियों को परखने का फैसला किया है।

इसके लिए उत्तर प्रदेश में एक से 15 अक्तूबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान टीम मोदी और कुछ अन्य प्रमुख लोग बूथ कमेटियों का इम्तिहान लेंगे।

इसकी तैयारी के लिए प्रदेश प्रभारी अमित शाह शुक्रवार को लखनऊ आ रहे हैं। इसके बाद उनका 2 अक्तूबर से लगभग एक सप्ताह का प्रदेश दौरा है।

बूथ कमेटियों की सच्चाई परखने के लिए उनसे कुछ सवाल पूछे जाएंगे। मसलन, संबंधित बूथ पर कितनी जगह के वोट पड़ते हैं? पिछले चुनाव में भाजपा को कितने वोट मिले थे?

पिछले चुनाव से अब तक संबंधित इलाके में हुए प्रमुख बदलाव और भाजपा की स्थिति के बारे में भी सवाल होंगे। सही जवाब न देने पर न सिर्फ उस बूथ कमेटी बल्कि उसके गठन के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी से पूछताछ की जाएगी।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ता काम भी करते हैं और फिर अपने काम की समीक्षा भी करते हैं।

इसीलिए बूथ कमेटियों के सत्यापन व समीक्षा का फैसला किया गया है। हर काम में सुधार की निरंतर गुंजाइश रहती है।

सपा ने भी नियुक्त किए प्रभारी
सपा ने भी बूथ कमेटियों की सच्चाई जानने के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की है। संबंधित लोकसभा क्षेत्र के लिए घोषित उम्मीदवारों को भी बूथ कमेटियों की सच्चाई परखने और अगर कहीं बूथ कमेटियां गठित नहीं हैं तो उनका गठन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

जिलाध्यक्षों से भी कहा गया है कि बूथ कमेटियों के गठन में कोई लापरवाही या हीलाहवाली बरदाश्त नहीं होगी।

इसलिए वे एक बार फिर आश्वस्त हो लें कि उनके यहां सभी क्षेत्रों में बूथ कमेटियां विधिवत गठित हो गई हैं। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी कहते हैं कि पार्टी बूथों के प्रबंध में कोई कोताही नहीं करेगी।

बसपा के एजेंडे में भी नंबर एक
बसपा भी बूथों की चिंता से अलग नहीं है। उसने अपने कोआर्डीनेटरों को बूथ कमेटियों की सच्चाई परखने और समीक्षा की हिदायत दी है।

यह भी कहा है कि बूथों के लिए बनी बुकलेट को  आधार बनाकर यह अभियान चलाया जाए ताकि पता चल सके कि तैयारी में कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई है।

जानकारी के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश अध्यक्ष को इस सिलसिले में कड़ी हिदायत दी है। पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कोआर्डीनेटरों से कहा था कि कहीं कोई कमी रह गई हो तो उसे तुरंत ठीक किया जाए।

मधुसूदन मिस्त्री करेंगे समीक्षा
बूथ प्रबंधन के मामले में कांग्रेस थोड़ा सुस्त दिख रही है। कांग्रेस के उप्र प्रभारी बनाए गए गुजरात के मधुसूदन मिस्त्री के भी जल्द ही लखनऊ आने की बात कही जा रही है।
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वह यहां चुनाव तैयारियों की समीक्षा भी करेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी के अनुसार, जोनल प्रभारियों व जोनल कोआर्डीनेटरों को बूथ कमेटियां बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह काम शुरू हो गया है। कांग्रेस का पूरा फोकस सोशल मीडिया पर है। इसके लिए दिल्ली में कार्यशालाएं हो चुकी हैं।
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