लखनऊ। ई-संजीवनी के माध्यम से चल रही टेलीमेडिसिन सुविधा को अब किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की खुराक मिलने वाली है। इसके बाद टेलीमेडिसिन के कहीं अधिक सशक्त और असरदायक होने की उम्मीद है। केजीएमयू में प्रदेश सरकार और संस्थान में बिल गेट्स एंड मिरांडा फाउंडेशन के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फाॅर टेलीमेडिसिन को मंजूरी मिली है।
सेंटर की प्रभारी डाॅ. शीतल वर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा टेलीमेडिसिन को मजबूत बनाने की है। इस समय ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से टेलीमेडिसिन सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। इसमें फोन और वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से डाॅक्टर मरीजों को परामर्श देते हैं। टेलीमेडिसन पर लोगों को भरोसा बढ़ने से कई फायदे हो सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों को घर बैठे चिकित्सीय परामर्श मिल सकेगा।
इससे न सिर्फ अस्पतालों, बल्कि सड़क पर भी भीड़ का दबाव कम होगा। इसलिए टेलीमेडिसिन सुविधा को न सिर्फ प्रसारित करना है, बल्कि इसे प्रभावी भी बनाना है। केजीएमयू का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इसी पर काम करेगा।
प्रशिक्षण का जिम्मा भी संभालेगा केजीएमयू
डाॅ. शीतल वर्मा ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस टेलीमेडिसन के माध्यम से दिए जा रहे प्रिसक्रिप्शन का ऑडिट करेगा। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कहीं कोई गैप तो नहीं है। अगर कोई अंतर है तो डाॅक्टर को इसके बारे में बताया जाएगा। डाॅक्टरों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे यह सुविधा अधिक प्रभावशाली बनेगी।
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Iटेलीमेडिसिन सेंटर के लिए बिल गेट्स एंड मिरांडा फाउंडेशन ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग देने की मंजूरी दी है। उम्मीद है कि केजीएमयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से टेलीमेडिसिन सुविधा और प्रभावी बनेगी।
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प्रो. सोनिया नित्यानंद, कुलपति, केजीएमयूI