देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस में रेलवे के खर्चे घटेंगे और बढ़ेगी कमाई, यात्रियों को मिलेंगी हवाईजहाज जैसी सुविधाएं
एयरपोर्ट की तर्ज पर रेलवे, तेजस एक्सप्रेस से यूजर यानी हैंडलिंग चार्जेस वसूलने की तैयारी में है। ट्रेन के निजी हाथों में जाने से एक ओर जहां यात्रियों को हवाईजहाज जैसी सुविधाएं मिलेंगी। वहीं रेलवे का स्टाफ बचेगा, खर्चे घटेंगे और खजाना भरेगा।
दरअसल, देश की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस के संचालन को लेकर आईआरसीटीसी व रेलवे बोर्ड अधिकारियों की ओर से तैयारियां जोरों से पूरी की जा रही हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रेन अगस्त से पटरी पर आ सकती है। इस बीच ट्रेन का रैक गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के न्यू वॉशिंग पिट पर लाकर खड़ा कर दिया गया है।
ट्रेन को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ रेलवे यूनियनों ने मोर्चा खोल रखा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो पैसेंजरों को कम समय में लखनऊ से दिल्ली का सफर तय करने का मौका मिलेगा और सुविधाएं भी।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ट्रेन निजी हाथों में होगी, पर उसका संचालन रेलवे के स्टेशनों पर होगा, इसलिए एयरपोर्ट की तर्ज पर ट्रेन केआने-जाने, रुकने, मेंटेनेंस वगैरह के एवज में कंपनी से यूजर यानी हैंडलिंग चार्ज भी वसूला जाएगा।
इससे रेलवे का मुनाफा और बढ़ेगा। इस पर फिलहाल मंथन चल रहा है और जल्द ही ट्रेन को पटरी पर लाने से पहले सारी कवायदों से पर्दा उठ जाएगा।
ट्रेन लखनऊ जंक्शन से आनंद विहार के बीच चलेगी और महज छह घंटे दस मिनट के भीतर सफर पूरा कर लेगी। ट्र्रेन का स्टॉपेज कानपुर स्टेशन रखा गया है।
टिकट पर हट सकती है सब्सिडी
रेलवे अधिकारी बताते हैं कि रेलवे टिकट पर सब्सिडी देता है, जिसका जिक्र टिकट पर भी होता है। ऐसे में जब ट्रेन निजी हाथों में होगी तो रेलवे को इस सब्सिडी की भी बचत होगी। ऐसे आसार जताए जा रहे हैं कि निजी कंपनी पैसेंजरों को जो टिकट देगा, उस पर सब्सिडी नहीं होगी, जिससे किराया भले ही महंगा हो। लेकिन यात्रियों को उसके एवज में विमान जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। दूसरे, सिर्फ उतने टिकटों की बिक्री होगी, जितनी ट्रेन में सीटें हैं। वेटिंग के टिकट नहीं बनाए जाएंगे।
बचेगा स्टाफ, घटेंगे खर्चे
तेजस के संचालन से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि एक ट्रेन को चलाने पर रेलवे को खासा स्टाफ इंगेज करना पड़ता है। फिर उनके टीए-डीए समेत अन्य खर्चे मिलाकर एक बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। पर, तेजस एक्सप्रेस में रेलवे का स्टाफ बचेगा, जिससे खर्चे घटेंगे। मसलन, एक ट्रेन केचलने पर रेलवे को हर तीन डिब्बों पर एक टीटीई, एक कोच अटेंडेंट प्रति एसी बोगी, आरपीएफ एस्कॉर्ट, एक इलेक्ट्रिकल अटेंडेंट, दो लोको पायलट, एक गार्ड समेत मेंटेनेंस स्टाफ लगाना पड़ता है।
इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे यात्री
तेजस एक्सप्रेस में सीसीटीवी कैमरे, स्मोक व फायर डिटेक्शन सिस्टम, रिमोट से खुलने व बंद होने वाले पर्दे, सेंसर बेस्ड ऑटोमेटिक दरवाजे, जीपीएस आधारित पैसेंजर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम, टी/कॉफी वेंडिंग मशीन, फ्री वाई-फाई, हर सीट पर मनोरंजन के लिए एलसीडी, जिसमें प्रीलोडेड फिल्में, गाने व गेम्स यात्रियों को मिलेंगे।