राजधानी लखनऊ में काकोरी के बसरैला गांव में चकमार्ग निर्माण में हुए घोटाले की विभागीय जांच में तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक दोषी पाए गए। अब विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद डीएम ने दोनों को बर्खास्त कर दिया है। इनसे गबन की गई 1.25 लाख रुपये की रकम की रिकवरी भी कराई गई।
वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों का सोशल ऑडिट कराया गया था। इसमें पता चला था कि बसरैला गांव में नहर से इरशाद के घर तक बनवाए गए चकमार्ग में 1 लाख 25 हजार 419 रुपये का गबन किया गया है।
मामले की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। इसमें जिला कृषि अधिकारी, सहायक निबंधक सहकारिता और सहायक अभियंता लघु सिंचाई को शामिल किया गया। कमेटी की जांच में गबन की पुष्टि हुई। मामले में दोषी पाए गए तकनीकी सहायक विपलव कुमार और रोजगार सेवक रितेश कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई है।
झूठा निकला दावा
दोषी पाए गए दोनों जिम्मेदारों को जांच के दौरान नोटिस जारी कर उनके पक्ष की सुनवाई की गई थी। इसमें इनकी ओर से दावा किया गया था कि मनरेगा आदि का जो भुगतान हुआ, वह सीधे खातों में किया गया। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं की गई, लेकिन जांच में दावा झूठा निकला। पता चला कि कूटरचित दस्तावेज तैयार कर रकम का गबन किया गया। इसके पुख्ता साक्ष्यो के आधार पर बर्खास्तगी की गई।
आखिर एफआईआर क्यों नहीं...
सवाल उठ रहा है कि गबन के साक्ष्य होने के बाद भी दोनों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई। सिर्फ विभागीय कार्रवाई कर छोड़ दिया गया। एक और सवाल यह भी है कि इनके उच्चाधिकारियों ने पहले गबन क्यों नहीं पकड़ा। उन अफसरों का पर्यवेक्षण भी सवालों के घेरे में है।