लखनऊ। हजरतगंज स्थित एक होटल में रविवार को अंडरस्टैंडिंग ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (टीडीसीएस) कार्यशाला हुई। ग्लोबल साइकियाट्रिक एसोसिएशन और इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की इस कार्यशाला में मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक विकारों के उपचार को टीडीसीएस तकनीक आसान बना रही है। केजीएमयू के डॉ. सुजीत कुमार कार ने बताया कि यह मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को उत्तेजित कर अवसाद और न्यूरोसाइकियाट्रिक विकारों में सहायक है। अवसाद, माइग्रेन, पुरानी घबराहट और स्ट्रोक के बाद पुनर्लाभ में यह तकनीक उपयोगी है। प्रो. आदर्श त्रिपाठी ने इसे बिना चीर-फाड़ वाली तकनीक बताया। यह मस्तिष्क की गतिविधियों को नियंत्रित कर विकारों का इलाज करती है। डॉ. मोहिता जोशी और प्रो. कार ने डॉक्टरों को मशीन के संचालन की व्यावहारिक जानकारी भी दी।