इसके जरिए टीबी को फैलने से रोका जा सकेगा। आईसीएमआर ने जांच की जिम्मेदारी केजीएमयू लखनऊ, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, एम्स भोपाल, जेआईपीएमईआर पुडुचेरी और एमजीआईएमएस वर्धा को दी है। देशभर में 40 हजार मरीजों की जांच की जाएगी। लखनऊ में नौ हजार मरीजों की जांच होगी।
जांच के लिए जिला स्तर के अस्पतालों से मरीजों का चयन
केजीएमयू में इस प्रोजेक्ट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि जांच के लिए मरीजों का चयन जिला स्तर के अस्पतालों से किया जाएगा। इसके पीछे तर्क है कि चिकित्सा संस्थानों में सामान्य लक्षण वाले मरीज कम पहुंचते हैं।
जिला अस्पतालों में आने वाले जिन एचआईवी, डायबिटीज पीड़ितों, वृद्ध, गर्भवती महिलाओं में खांसी, बुखार से जुड़ी समस्या मिलेगी, उनकेबलगम का सैंपल लिया जाएगा। जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि होगी, उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के जरिए देखा जाएगा कि कितने ऐसे मरीज हैं, जिनमें टीबी के लक्षण स्पष्ट नहीं थे, फिर भी उनमें टीबी पाया गया। इस अध्ययन के निष्कर्ष से आईसीएमआर को अवगत कराया जाएगा। इस अध्ययन के बाद संभव है कि एचआईवी की तरह भविष्य में हाई रिस्क ग्रुप के लिए टीबी की जांच अनिवार्य कर दी जाए।
स्टाफ भर्ती प्रक्रिया शुरू
डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत एक मेडिकल ऑफिसर, एक प्रोजेक्ट टेक्नीकल ऑफिसर, चार प्रोजेक्ट असिस्टेंट और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती की जा रही है। इनके साक्षात्कार हो गए हैं। अगले महीने से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
डीएमसीएस लैब -- 2021
सीबीएनएएटी लैब -- 141
पंजीकृत मरीज -- 4,79,446
मल्टी ड्रग रेजीस्टेंट (एमडीआर) -- 15000
एक्स्ट्रीम ड्रग रेजीस्टेंट (एक्सडीआर) -- 1600
...और लखनऊ में
पंजीकृत मरीज -- 12500
एमडीआर मरीज -- 550
एक्सडीआर मरीज -- 60