उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ ने बृहस्पतिवार को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से वार्ता विफल होने के बाद 21 जनवरी को प्रदेश के सभी स्तर के विद्यालयों और महाविद्यालयों में तालाबंदी करने का निर्णय लिया है। साथ ही सामूहिक अवकाश लेकर शिक्षकों से जनपद स्तर पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। इससे पूर्व प्रदेश भर से आए शिक्षकों ने ईको गार्डन में पुरानी पेंशन समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
महासंघ के संयोजक व एमएलसी ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि शिक्षक महासंघ के प्रतिनिधि मंडल ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से वार्ता की। इस पर उपमुख्यमंत्री ने महासंघ के ज्ञापन में सम्मिलित बिंदुओं पर चर्चा करने में असमर्थता व्यक्त कर दी। उन्होंने बताया कि शिक्षक समुदाय सरकार की उपेक्षा नीति से आहत है।
प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री इंद्रासन सिंह, जगवीर किशोर जैन, हेम सिंह पुंडीर समेत कई शिक्षक नेता शामिल रहे। उन्होंने बताया कि वार्ता विफल होने के बाद शिक्षक समाज अपमानित अनुभव कर रहा है।
राष्ट्र निर्माता के रूप में उन्हें समाज में जो सम्मान उपलब्ध था उस पर भी सरकार की नीतियां आक्रामक हैं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी को प्रदेश के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में तालाबंदी की जाएगी। शिक्षक सामूहिक अवकाश लेकर अपने-अपने जनपदों में प्रदर्शन करेंगे।
इन संगठनों के शिक्षक रहे धरने पर
प्रदेश भर के माध्यमिक, प्राथमिक, जूनियर, महाविद्यालयों और मदरसा शिक्षकों ने ईको गार्डन में प्रदर्शन किया। बताया गया करीब दोपहर दो बजे तक करीब दो लाख शिक्षक धरने पर बैठ गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षक कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षक एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ, आदर्श संस्कृत विद्यालय शिक्षक समिति, उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के शिक्षक नेता व शिक्षक शामिल रहे। इस दौरान डॉ. रवींद्र नाथ शुक्ल, डॉ. भोजपाल सिंह, अवधेश मिश्रा, कृष्ण मोहन शुक्ल, हाजी दीवान साहब समेत कई शिक्षक नेता शामिल रहे।
शिक्षकों की मांगें
पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने, निशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ देने, समान कार्य के लिए समान वेतन देने, समान सेवा शर्तें प्रभावी बनाने, रिक्त शिक्षकों के पदों को भरने समेत अन्य मांगें शामिल हैं। वार्ता विफल होने के बाद शिक्षकों ने विद्यालयों में तालाबंदी करने का निर्णय लेते हुए प्रदर्शन समाप्त किया।