यूपी समेत अन्य प्रांतों में आतंक फैलाने की साजिश में जुटे इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) को अन्य आतंकी संगठनों व आईएसआई से हथियार मिल रहे हैं।
गोरखपुर में बरामद एके-47 भी आतंकियों को नेपाल के रास्ते लाकर दी गई थी।
आईएसआई सीमा पर सक्रिय माओवादियों को भी इसी तरह पिछले एक अरसे से हथियार मुहैया कराने की मुहिम में लगी हुई है।
इस बात का खुलासा पिछले दिनों गिरफ्तार हुए आतंकियों से दिल्ली और लखनऊ में पूछताछ के दौरान ये खुलासा हुआ है।
हालांकि, आईएसआई व विभिन्न आतंकी संगठन भारत में आसानी से घुसपैठ करने के लिए लंबे अरसे से काठमांडू को अपना बेस बनाए हुए हैं।
कई और चीजों की होती है सप्लाई
यहीं से आईएसआई के इशारे पर जाली मुद्रा, मादक पदार्थ और हथियारों की सप्लाई कराई जाती है। साथ ही आतंकी माड्यूल को भी समय-समय पर रकम व असलहे मुहैया कराए जाते हैं।
गोरखपुर में पकड़े गए तहरीक-ए-तालिबान से प्रशिक्षित आतंकियों अब्दुल वलीद और मोहम्मद ओवैस से जो दो एके-47 व दो चाइनीज पिस्तौल बरामद हुई वह भी काठमांडू से गोरखपुर लाई गई थी।
हालांकि, इसे इन दोनों आतंकियों को काठमांडू में ही दिया जा सकता था, लेकिन इसे अन्य तरीके से गोरखपुर पहुंचा कर इन दोनों को सौंपा गया।
कुछ आतंकी पहले से ही डाले हुए थे डेरा
एटीएस सूत्रों से जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार इन दोनों आतंकियों को गोरखपुर में ही असलहे दिए गए। असलहों को दोनों आतंकियों से कुछ दिन पहले पहुंचे उनके अन्य साथियों के साथ ही भेजा गया था।
अगर एटीएस की रिपोर्ट को सही माना जाए तो इससे साबित होता है कि वलीद व ओवैस के यूपी पहुंचने से पहले उनके कई अन्य साथी पहले से ही यहां डेरा डाल चुके हैं।
जांच एजेंसियां लगातार चल रही पूछताछ में आतंकियों से यही जानने की कोशिश में लगी हैं कि किसी तरह पहले से यहां पहुंच चुके आतंकियों के बारे में कोई सुराग हासिल हो जाए ताकि इनकी भी धरपकड़ हो सके।
एटीएस जुटा रही जानकारी
हालांकि, एटीएस को इस मामले में अभी कोई उल्लेखनीय जानकारी या साक्ष्य हाथ नहीं लग सका है।
सूत्र बताते हैं कि पूछताछ के साथ-साथ एटीएस नेपाल से गोरखपुर के चैनल की जानकारी करने में भी जुट गई है।
यह पता करने की कोशिश हो रही है कि गोरखपुर से नेपाल के बीच का लिंक क्या है। इसके लिए एटीएस गोरखपुर में सक्रिय आईएम के माड्यूल को दबोचना चाहती है।