लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 14वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवर शिखर सम्मेलन (आई-लिप्स 2026) के दूसरे दिन शनिवार को विशेषज्ञों ने पुस्तकालयों और एआई पर विचार रखे। नॉर्वे, सिंगापुर और थाईलैंड के विशेषज्ञ ऑनलाइन जुड़े। डॉ. राजेश कुमार ने पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए व्यवहार कुशलता और समर्पण जरूरी बताया। सिंगापुर के प्रो. ली चू केओंग ने कहा कि मानवीय बुद्धिमत्ता एआई से ज्यादा प्रभावी है। डॉ. नीरज कुमार सिंह ने कॉपीराइट और एआई के नैतिक उपयोग पर यूजीसी की नीति न होने का मुद्दा उठाया। डॉ. वेंकट राव पोकरि ने पुस्तकालयाध्यक्षों को सर्च इंजन से अधिक महत्वपूर्ण बताया। पैनल चर्चा में डॉ. बाबिता गौर ने एआई में मानवीय संवेदना के अभाव पर जोर दिया। डॉ. पीआर गोस्वामी ने एआई सामग्री की विश्वसनीयता, डॉ. जतिंदर कुमार ने एआई साक्षरता और डॉ. एनके खत्री ने शिक्षक प्रशिक्षण की जरूरत बताई।