राजधानी के 6 से 14 साल के सवा 11 प्रतिशत बच्चे मोटापे की चपेट में आ चुके हैं। इसकी वजह से उनके बड़े होने पर डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
केजीएमयू और लखनऊ विवि के विभिन्न अध्ययन इस खतरे को सामने ला रहे है। 1991 में आज ही के दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन ने डायबिटीज डे मनाने की शुरुआत की थी।
साइलेंट किलर कही जाने वाली बीमारी डायबिटीज टाइप-2 लखनऊ के युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। दुनिया भर में जहां 50 से 60 वर्ष की उम्र में टाइप-2 डायबिटीज के अधिकतर मामले मिल रहे हैं, वहीं हमारे यहां 35 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लोग चपेट में आ रहे हैं।
इस बारे में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र सिंह बताते हैं इसकी शुरुआत बचपन से ही हो रही है। कम उम्र में जो शारीरिक गतिविधियां हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती थीं, उनकी जगह अब इंडोर गतिविधियों ने ले ली हैं और यह मोटापा बढ़ा रही हैं। वर्ल्ड डायविटीज डे पर विशेष रिपोर्ट...
केजीएमयू के फिजियोलॉजिस्ट डॉ. नरसिंह वर्मा फिलहाल यूपी में डायबिटीज के मरीजों का डाटा तैयार कर रहे हैं। इसके लिए विभिन्न जिलों पर अध्ययन जारी है और अब तक जुटाए आंकड़ों के अनुसार करीब 10 प्रतिशत नागरिकों में डायबिटीज है या फिर वे प्री-डायबिटीज की स्टेज में हैं और आने वाले 10 से 15 साल में डायबिटीज होने की आशंका बनी है।
दूसरी ओर कक्षा 1 से 9 में पढ़ रहे करीब 1,862 बच्चों पर लखनऊ यूनिवर्सिटी की अध्ययनकर्ताओं क्षिप्रा गुप्ता और रुचिरा राठौड़ द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में उन फैक्टर्स को सामने रखा गया जो इन बच्चों में मोटापा बढ़ा रहे हैं।
मोटापा है डायबिटीज की शुरूआत की प्रमुख वजह
डायबिटीज
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ये सभी बच्चे मध्यम आय वर्ग के परिवार से ताल्लुक रखने वाले हैं। इनमें 988 लड़के और 838 लड़कियां शामिल थे। लखनऊ के डीआईओएस के जरिए विभिन्न स्कूलों से संपर्क किया गया। यह अध्ययन मोटापे को लेकर किया गया क्योंकि मोटापा ही डायबिटीज से लेकर हृदय रोगों की शुरुआत की प्रमुख वजह माना जाता है।
बच्चों को ऐसे बचाएं डायबिटीज से
भोजन : चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को बढ़ती उम्र के साथ साथ डायबिटीज की चपेट में आने से बचाने के लिए जरूरी है कि उन्हें पौष्टिक भोजन खाने की आदत डालें।
हाई एनर्जी और हाई फैट रखने वाले फास्ट फूड, ड्रिंक्स के बजाय उन्हें ऐसा भोजन पसंद करने की आदत डालें जो प्रोसेस्ड नहीं हो। यानी ऐसा भोजन जो पैकेट में नहीं बेचा जा रहा है। जंक फूड को बेसिक फूड का रिप्लेसमेंट न बनने दें।
फिजिकल एक्टिविटी : मोबाइल और कंप्यूटर पर गेम खेलने की आदत होने के बावजूद बच्चे पार्क और मैदान में खेलना पसंद करते हैं। उन्हें इसके ज्यादा से ज्यादा मौके दिए जाएं।
हर बच्चे को किसी न किसी एक खेल से जोड़ें, हर बच्चे का एक खेल होना चाहिए। स्कूल इसके लिए अपने खेल पीरियड को अनिवार्यता से लागू करें तो अभिभावक भी घर के निकट पार्क या मैदान में बच्चों को खेलने के लिए प्रेरित करें।
बढ़ती उम्र के साथ वजन पर नजर : किशोरावस्था और युवावस्था में पहुंचने के साथ-साथ अपने वजन और शरीर के साइज पर भी नजर रखें। चिकित्सकों के अनुसार अगर आपकी कमर पर 36 के साइज की ट्राउजर आ रही है तो आप प्री-डायबिटीक स्टेज में पहुंच रहे हैं, वजन और कमर के इर्द गिर्द मौजूद फैट्स को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं।