हमदर्दी की बात हो तो भाजपा की काट तलाशना मुश्किल है। वह भी तब, जब मामला किसी कुशवाहा से जुड़ा हो।
बाबू सिंह कुशवाहा जब मुसीबत में पड़े तो उन्हें गले लगाने के लिए भाजपा आगे आई। हालांकि इस पर बहस हो सकती है कि भाजपा को इस दुस्साहस से क्या मिला और क्या छिना?
अब दूसरे कुशवाहा के कष्टों पर भाजपा पिघलती दिख रही है। जी हां! बात हो रही है रामआसरे कुशवाहा की।
कुशवाहा के खिलाफ सपा नेतृत्व इतना सख्त क्यों हुआ, यह जमीनी हकीकत किसी को पता हो न हो, भाजपा ने पता लगा लिया है।
पार्टी के एक मोर्चा ने उनकी बर्खास्तगी के लिए मुलायम सिंह को बुरा-भला कहते हुए दावा किया कि कुशवाहा को भाजपा सरकार में बनी सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों का समर्थन करने की सजा दी गई है।