अनुराग बाजपेई लखनऊ। शहर की यूपी बैडमिंटन अकादमी में होने वाले सैयद मोदी बैडमिंटन टूर्नामेंट का कद घटने से इसकी लोकप्रियता पर असर तो पड़ेगा लेकिन दिग्गज खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में भारतीय शटलरों के पास अपनी क्षमता दिखाने का मौका होगा। साथ ही मेजबान होने के कारण प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों की प्रतिभागिता भी बढ़ेगी।
बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) की ओर से जारी अगले वर्ष के कैलेंडर में देश में वर्ल्ड टूर के महज दो टूर्नामेंट ही बचे हैं। ऐसे में यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के लिए यह राहत की बात है कि इंडिया ओपन के अलावा सैयद मोदी बैडमिंटन टूर्नामेंट को जारी खेल कैलेंडर में शामिल किया गया है जबकि ओडिशा और गुवाहाटी मास्टर्स जैसे टूर्नामेंट को वर्ल्ड टूर से हटा दिया गया है।
यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव डॉ. सुधर्मा सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में बड़े खिलाड़ियों की कमी खलेगी, लेकिन हम इसे सकारात्मक रूप में देख रहे हैं। वर्ल्ड टूर की सुपर-100 श्रेणी में शामिल होने के बाद भारतीय शटलरों को अपनी क्षमता दिखाने का भरपूर मौका होगा। मेजबान प्रदेश होने के कारण यूपी के खिलाड़ी टूर्नामेंट के क्वालिफाइंग राउंड में खेलकर मुख्य ड्रॉ में जगह बना सकते हैं।
सुपर-300 की बजाय सुपर-100 श्रेणी में शामिल हुआ टूर्नामेंट
इस साल 24 से 29 नवंबर को आखिरी मौका होगा, जब इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दुनिया के दिग्गज शटलर चमक बिखेरते दिखेंगे। दरअसल बीडब्ल्यूएफ ने अगले साल से इस टूर्नामेंट की श्रेणी वर्ल्ड टूर सीरीज सुपर-300 से घटाकर वर्ल्ड टूर सीरीज सुपर-100 कर दी है। इस फैसले से देश के दूसरे सबसे बड़े बैडमिंटन टूर्नामेंट में पहले वाली रौनक नहीं दिखेगी और दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी इस आयोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे। अगले साल यह प्रतियोगिता 27 जुलाई से एक अगस्त तक खेली जाएगी। बीडब्ल्यूएफ ने यह फैसला संभवत: व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को देखकर लिया है ताकि खिलाड़ियों के चोटिल होने की संभावना कम हो।
टूर्नामेंट के इतिहास पर एक नजर
यह आयोजन आठ बार के राष्ट्रीय चैंपियन और 1982 राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सैयद मोदी की स्मृति में किया जाता है। इस टूर्नामेंट की शुरुआत वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से की गई थी। वर्ष 1991 से 2003 तक यह टूर्नामेंट राष्ट्रीय स्तर का था। वर्ष 2004 में इसे पहली बार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का दर्जा मिला। वर्ष 2009 में यह टूर्नामेंट आधिकारिक तौर पर बीडब्ल्यूएफ की ग्रैंड प्रिक्स सीरीज का हिस्सा बन गया। वर्ष 2011 में इसे बीडब्ल्यूएफ ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड में अपग्रेड किया गया। वर्ष 2018 के बाद इस टूर्नामेंट को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 का आधिकारिक दर्जा मिला।
छह श्रेणियों में होते हैं बीडब्ल्यूएफ के आयोजन
1. बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स : यह सबसे बड़ा टूर्नामेंट है। इसमें साल भर के बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष आठ खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं।
2. सुपर 1000 : यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में से एक है (जैसे ऑल इंग्लैंड ओपन)। इसमें दुनिया के शीर्ष 15 खिलाड़ियों की भागीदारी अनिवार्य होती है।
3. सुपर 750: यह टूर का दूसरा सबसे बड़ा स्तर है (जैसे इंडिया और डेनमार्क ओपन)।
4. सुपर 500 : इसमें उच्च-स्तरीय रैंकिंग अंक और पुरस्कार राशि होती है (जैसे इंडोनेशिया मास्टर्स)।
5. सुपर 300 : यह मध्यम स्तर का टूर्नामेंट है, जो खिलाड़ियों को वर्ल्ड रैंकिंग में ऊपर चढ़ने के लिए महत्वपूर्ण अंक देता है।
6. सुपर 100 : यह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर का सबसे निचला स्तर है, जो कम रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के लिए शुरू किया गया है।